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मोदी सरकार 2.0 का पहला एक साल विफलता,नाकामी का काला अध्याय : मोहन मरकाम

रविशंकर शर्मा  | 30 May , 2020 10:16 PM
मोदी सरकार 2.0 का पहला एक साल विफलता,नाकामी का काला अध्याय : मोहन मरकाम

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने मोदी सरकार के 2.0 के पहले एक साल को विफलता और नाकामी का काला अध्याय कहा है। मरकाम ने कहा है कि कोरोना से निपटने से लेकर अर्थव्यवस्था तक हर मामले में मोदी सरकार विफल साबित हुई है। 40 करोड़ भारतीयों के गरीबी रेखा के नीचे जाने की स्थिति बनने के लिए मोदी सरकार 2.0 का पहला साल जिम्मेदार है। साम्प्रदायिक दंगे भड़कने और नागरिकता के काले कानून के लिए मोदी के इस एक वर्ष को याद किया जाएगा। महाराष्ट्र बंद, दिल्ली और हरियाणा के चुनावों में भाजपा की हार हुई। हरियाणा में भाजपा अनैतिक गठबंधन करके सरकार बना पाई। यातायात का काला कानून लाया गया,जिसमें भारी भरकम जुर्माने का प्रावधान है। पूरा देश आज नोटबंदी और गलत तरीके से जीएसटी लागू करने की गलती को भुगत रहा है। अर्थव्यवस्था मांग की बड़ी भारी कमी से जूझ रही है और जिस तरह से सरकार ने 20 लाख करोड़ के जुमले की घोषणा की है, उससे मांग की सृजन की कोई उम्मीद भी नहीं है। आंकड़ों से ये बात स्पष्ट हो गया है कि कोरोना संक्रमण के फैलने के पूर्व ही अर्थव्यवस्था स्लोडाउन फेज में थी। जिस तिमाही के आंकड़े आये हैं उसमें लॉक डाउन सिर्फ एक हफ्ता ही था।

मोहन मरकाम ने केंद्र सरकार से इन सवालों का जवाब मांगा है। पिछले 4 साल से लगातार गिरती जीडीपी का जिम्मेवार कौन है? बड़े विज्ञापनों के बावजूद मेक इन इंडिया स्कीम धराशायी क्यों हुई? 20 लाख करोड़ के पैकेज गरीबों, मध्यमवर्ग, किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी, निजी नौकरी करने वालों किसी को भी क्यों कुछ नहीं मिला? आर्थिक मामले में ट्रिलियन इकानॉमी की बात करने वाली मोदी सरकार की अर्थव्यवस्था की चिंताजनक बातों को उजागर करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि 1.4 (माइनस 1 प्वाइंट 4) प्रतिशत की मैन्यूफेक्चरिंग ग्रोथ ये स्पष्टतया दशार्ती है कि अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। 2020 की मैन्यूफेक्चरिंग विकास दर 0 प्रतिशत ने सरकार के मेक इन इंडिया प्रोग्राम की पूरी पोल खोल दी। फैक्ट्री आउटपुट का 16 प्रतिशत पर पहुंचना स्पष्टतया एमएसएमई सेक्टर की व्यथा को बयान करता है और किस तरह इस सेक्टर से रोजगार के अवसर खत्म हुए, उसकी कहानी बताता है। 0.6 (माईनस 0 प्वाइंट 6) प्रतिशत की औद्योगिक विकास दर स्पष्टतया ये दशार्ती है कि समस्या इकोनॉमी के सारे सेक्टर में है। क्वार्टर आन क्वार्टर जिस तरह से सर्विस सेक्टर नीचे गिरता जा रहा है,जो कि किसी समय में भारतीय अर्थव्यवस्था की शान हुआ करता था, स्पष्टतया सरकार की गलत नीतियों एवं अपेक्षा की ओर, और लगातार अपेक्षा का चिन्हित करता है। 2.2 (माईनस 2 प्वाइंट 2) प्रतिशत की विकास दर कंस्ट्रक्शन सेक्टर में स्पष्टतया ये दशार्ती है कि लॉकडाउन के अनाउंसमेंट के पहले ही प्रवासी मजदूरों एवं कामगारों के मध्य भयानक बेरोजगारी उपस्थित थी।

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