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रिहाई की मांग को लेकर हुआ आदिवासियों का प्रदर्शन प्रायोजित आंदोलन : संजय श्रीवास्तव 

रविशंकर शर्मा  | 15 Sep , 2020 10:31 PM
रिहाई की मांग को लेकर हुआ आदिवासियों का प्रदर्शन प्रायोजित आंदोलन : संजय श्रीवास्तव 

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने गंभीर आरोप लगाए हैं। श्रीवास्तव ने बस्तर में आदिवासियों की रिहाई की मांग को लेकर हुए आदिवासियों के प्रदर्शन को प्रदेश सरकार और नक्सलियों की ओर से प्रायोजित आंदोलन बताया है। राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए श्रीवास्तव ने कहा है कि वह इस मामले में दोहरे चरित्र का परिचय दे रही है।  नक्सली उन्मूलन के लिए लगभग दो साल में भी कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई जा सकी है। नक्सलियों के प्रति प्रदेश सरकार का नरम रुख कई संदेह और सवाल खड़े कर रहा है। श्रीवास्तव ने कहा है कि, कांग्रेस ने चुनाव से पूर्व बस्तर में गिरफ़्तार जिन आदिवासियों की रिहाई की बात कही थी, वे वास्तव में नक्सली तत्व हैं। अब प्रदेश सरकार को यह महसूस हो रहा है कि, जेलों से उनको रिहा करना करना प्रदेश के लिए घातक हो सकता है। रिहाई की मांग को लेकर नक्सलियों के दबाव से जूझती प्रदेश सरकार इन लोगों की रिहाई से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों को लेकर हिचकिचा रही है। खुद की परेशानी से बचने के लिए अब नक्सलियों से अपनी मित्रता निभाती दिख रही है। झीरम घाटी के नक्सली हमले के सबूत पेश नहीं करके भी मुख्यमंत्री बघेल क्या कांग्रेस-नक्सली मित्रता निभा रहे हैं? श्रीवास्तव ने हैरत जताई कि , एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर नक्सली उन्मूलन के लिए एक अतिरिक्त बस्तरिया बटालियन की मांग करते हैं। दूसरी तरफ बस्तर में नक्सली प्रदेश सरकार को हमारी सरकार बताकर व्यापक पैमाने पर हिंसा कर रहे हैं। प्रदेश सरकार साफ करें कि आखिर यह रिश्ता क्या है? क्या आदिवासियों के नाम पर हुआ यह प्रदर्शन नक्सलियों का शक्ति प्रदर्शन नहीं है, ताकि प्रदेश सरकार इस प्रदर्शन की आड़ लेकर नक्सलियों को रिहा कर दे।

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