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संविधान व संवैधानिक मूल्यों पर बोला जा रहा है षडयंत्रकारी हमला: सोनिया गांधी

ग्लिब्स टीम  | 25 Jan , 2020 09:48 PM
संविधान व संवैधानिक मूल्यों पर बोला जा रहा है षडयंत्रकारी हमला: सोनिया गांधी

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि आर्थिक मंदी एवं बेरोजगारी की समस्या से ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक आधार पर लोगों को बांटने तथा संविधान को कमजोर करने की साजिश हो रही है। सोनिया गांधी ने 71वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा, 70 वर्ष पूर्व देश के लोगों की आकांक्षाओं व इच्छाओं के अनुरूप भारत के संविधान को देश व देशवासियों ने अपनाया व लागू किया। हमारे संविधान की प्रस्तावना में सबके लिए न्याय, समानता, आज़ादी, धर्मनिरपेक्षता व भाईचारे की भावना रेखांकित है।

उन्होंने कहा, "संविधान का हर अक्षर केवल एक शब्द मात्र नहीं पर हर नागरिक का जीवनदर्शन व सरकारों के लिए शासन चलाने का जीवंत रास्ता है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा,'यह रास्ता गांधीजी के नेतृत्व में करोड़ों स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी से लिखा गया है, जहां हर भारतवासी को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता के अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, सच्चाई यह है कि आज देश के संविधान व संवैधानिक मूल्यों पर षडयंत्रकारी हमला बोला जा रहा है। संवैधानिक मान्यताओं पर संस्थागत तौर से अतिक्रमण किया जा रहा है व संवैधानिक संस्थाओं को व्यक्तिगत निरंकुशता की बलि चढ़ाई जा रही है। सोनिया ने कहा, ऐसे में संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े होना हर देशवासी का कर्तव्य है।

उन्होंने कहा, आज खेती और किसान बर्बादी की कगार पर हैं। मंदी और तालाबंदी के चलते छोटे छोटे व्यवसायी व दुकानदार अपने आपको असहाय महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि अर्थव्यवस्था बदहाल है, आर्थिक प्रगति चौपट है व व्यापारिक मंदी हर पायदान पर दस्तक दे रही है। आवाज उठाने वाले हर व्यक्ति पर सरकारी तंत्र का दमनचक्र चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया, आर्थिक बदइंतजामी, प्रशासनिक दिवालियेपन, बेतहाशा महंगाई, चौतरफा मंदी, असहनीय बेरोजगारी जैसी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए देशावासियों को धर्म, क्षेत्रवाद और भाषा के आधार पर बांटने तथा संविधान को कमजोर करने की साजिश की जा रही है। 

 

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