GLIBS

Assembly Election : छत्तीसगढ़ के चुनावी चौसर पर मोहरों की माया 

आर पी सिंह  | 07 Oct , 2018 03:02 PM
Assembly Election : छत्तीसगढ़ के चुनावी चौसर पर मोहरों की माया 

नई दिल्ली। अगले महीने की 12 और 20 तारीख को छत्तीसगढ़ में वोट डाले जायेंगे। चुनावी बिगुल बजते ही चुनावी चौसर की बिसात बिछ गई है। मोहरों की जोर आजमाइश भी शुरू हो गई है। कोई अपने मोहरों की धूल झाड़ने में मस्त है, तो कोई उसको तेल पिला रहा है। सियासी गणित को लेकर नए-नए समीकरण बनाए और बिगाड़े जाने लगे हैं। वहीं अटकलों का दौर भी तेज होता जा रहा है। किसको नफा-किसे नुकसान की चर्चाओं के बीच इस बार 23,632 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जाएंगे, जो पिछले बार की तुलना में 10.34 फीसदी ज्यादा हैं।

छत्तीसगढ़ के सियासी हालात को देखें तो राज्य में कुल सीटों की संख्या 90 हैं, जहां दो चरणों में 12 को 18 सीटों पर और 20 नवंबर को 72 सीटों पर चुनाव कराए जाएंगे। सीटों की अगर बात करें तो सामान्य वर्ग के लिए 51, एससी की 10 और एसटी की 29 सीटें हैं। प्रदेश में पिछले 15 साल से बीजेपी की सरकार रमन सिंह के नेतृत्व में है। इस बार फिर से भाजपा ने रमन सिंह पर ही दांव लगाया है।

जकांछ और बसपा का गठबंधन:

इस बार के चुनाव में जो सबसे खास बात है, वो जोगी कांग्रेस का एक बड़ा जनाधार खड़ा करना और उसका बसपा के साथ गठबंधन करना। सियासी पंडितों के लिहाज से ये गठबंधन ऐसा है, जिसने कई प्रत्याशियों की नींद उड़ा दी है। आंकड़े बताते हैं कि जोगी कांग्रेस अगर खुद नहीं भी जीत पायी, तो दूसरे की हार की बड़ी वजह बन सकती है। 2013 के विधानसभा चुनाव पर अगर नजर डालें तो कुल 90 सीटों में से बीजेपी को 49 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस को 39 सीटों से संतोष करना पड़ा था, बीएसपी को एक और एक सीट पर निर्दलीय के खाते में गई थी।

क्या कहते हैं आंकड़े:

2013 में वोट प्रतिशत के हिसाब से बीजेपी और कांग्रेस में ज्यादा फर्क नहीं रहा था। बीजेपी को 42.3 फीसदी और कांग्रेस को 41.6 फीसदी मत मिले थे। बीएसपी को सीट केवल एक मिली थी लेकिन उसका मत प्रतिशत 4.4 प्रतिशत रहा था और यही वजह थी की कांग्रेस बीएसपी को साथ लेना चाहती थी। अगर इस बार दोनों का मत प्रतिशत एक साथ जुड़ जाता तो जाहिर तौर पर कांग्रेस के 15 साल के वनवास के खत्म होने की उम्मीदें ज्यादा बढ़ जातीं।

कांग्रेस की बढ़ सकती हैं मुश्किलें:

बीएसपी और अजीत जोगी की जोड़ी अब बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। एससी की 10 में से 9 सीटों पर अभी बीजेपी का कब्जा है। इसी तरह एसटी की 29 सीटों में से बीजेपी के पास 11 और कांग्रेस के पास 18 सीटें हैं। जोगी का पूरे प्रदेश में असर नहीं है लेकिन आदिवासी और दलितों के बीच उनकी पकड़ अच्छी है। इसलिए अब बीएसपी और जोगी की जनता कांग्रेस एससी की 10 और एसटी की 29 सीटों पर असर डाल सकती हैं।

क्या कहते हैं निर्वाचन आयोग के आंकड़े:

राज्य की 42 जनजातियों में सबसे ज्यादा जनाधार गोंड जनजाति का है। वर्ष 2011 की जनसंख्या पर अगर नजर डालें तो इनकी कुल जनसंख्या 7822902 है। जो राज्य की कुल जनसंख्या का 30.6 प्रतिशत है। इनमें उरांव सबसे ज्यादा साक्षर हैं तो हल्बा संपन्न। इन में 50.11 प्रतिशत लोग साक्षर बताए जा रहे हैं। ये आंकड़े राष्ट्रीय जनगणना विभाग के हैं। अब अगर इतनी बड़ी जनसंख्या है तो फिर इनको अनदेखा तो नहीं किया जा सकता।राज्य में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी खुद को इनका खैरख्वाह बताती है। उसके अध्यक्ष हीरा सिंह मरकाम हैं। पिछले कई चुनावों में इस पार्टी ने प्रदेश में कोशिशें तो कीं मगर सफलता नहीं मिल पाई।

क्या कहते हैं राज्य के चुनाव परिणाम:

प्रदेश के निर्वाचन आयोग के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो  वर्ष 2003 में हुए चुनावी परिणामों में भारतीय जनता पार्टी ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा था। 50 पर जीत हासिल की थी। इसमें उसके कुल 33.26 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस ने भी 90 सीटों पर चुनाव लड़ा 37 सीटों पर जीत हासिल की। उसे कुल 36.71 प्रतिशत वोट मिले। तो गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने 41 सीटों पर चुनाव लड़ा कोई सफलता नहीं मिली। कुल मिलाकर 1.60 प्रतिशत वोट हासिल किए।

2008 में हुए चुनावों में भाजपा  90 सीटों पर चुनाव लड़ी। 50 सीटें जीतीं कुल 40.33 प्रतिशत वोट हासिल  किए। कांग्रेस ने 87 सीटों  पर चुनाव लड़ा। 38 सीटें जीतीं 38.63 प्रतिशत वोट हासिल किए। तो वहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने 54 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए कहीं भी नहीं जीती मगर 1.59 प्रतिशत वोट हासिल किए।  2013 में हुए चुनावों में भाजपा ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा। 49 सीटें जीतीं और 41.04 प्रतिशत वोट हासिल किए। वहीं कांग्रेस ने भी 90 सीटों पर चुनाव लड़ा। 39 सीटें जीतीं 40.43 प्रतिशत वोट हासिल किए। तो वहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने 44 सीटों पर चुनाव लड़ा। सभी हार  गई मगर 1.57 प्रतिशत मत हासिल किए।

60 सीटों पर  चुनाव लड़ने की तैयारी:

इधर अगर पार्टी के सुप्रीमों हीरा सिंह मरकाम की मानें तो पार्टी इस बार भी 60 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी। इस बार उन्होंने तय किया है कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी अपने दम पर ये चुनाव लड़ेगी।

कांग्रेस के साथ गठबंधन पर नहीं बनी बात:

हीरा सिंह मरकाम कांग्रेस के साथ गठबंधन करने की फिराक में थे। उन्होंने पहले कहा कि वे पाली-तानाखार से चुनाव लड़ेंगे। वहां से कांग्रेस के रामदयाल उइके विधायक हैं। कांग्रेस वहां से किसी दूसरे को खड़ा नहीं करना चाहती थी। ऐसे में बात नहीं बनी। तो वहीं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी से गठबंधन को हीरा सिंह मरकाम ने ये कहते हुए खारिज कर दिया कि अजीत जोगी उनसे जूनियर हैं। उनके पास डिग्री है और मेरे पास दिमाग। आंकड़ों पर अगर गौर करें तो एक बात तो  तय है कि गोंगपा अगर कुछ नहीं कर पाई तो वो वोट जरूर काटेगी। अब वे वोट भाजपा, जकांछ, कांग्रेस या फिर बसपा में से किसी के भी हो सकते हैं।

Author/Journalist owns and is responsible for views/news published and the publisher/printer is in no way liable for such content.