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भाजपा का धरना प्रदर्शन हुआ फ्लाप, धान खरीदी के मुद्दे पर उनकी दूसरी विफलता : त्रिवेदी

रविशंकर शर्मा  | 22 Feb , 2020 09:55 PM
भाजपा का धरना प्रदर्शन हुआ फ्लाप, धान खरीदी के मुद्दे पर उनकी दूसरी विफलता : त्रिवेदी

रायपुर। भाजपा के धरना प्रदर्शन को विफल करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि किसानों के नाम पर भाजपा का प्रदर्शन फ्लाप शो रहा। धरना स्थलों में भाजपा के नेताओं में आपसी मारपीट और झूमाझटकी होती रही। बीजापुर में तो किसानों ने भाजपा के नेताओं को आंदोलन स्थल से भगाया और कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी के घर चले गये। इसी बौखलाहट में भाजपा नेताओं ने अपशब्दों का इस्तेमाल किया। इसके लिए स्वयं पूर्व मंत्री महेश गागड़ा को माफी मांगनी पड़ी।

त्रिवेदी ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के किसानों ने भाजपा को समर्थन देना छोड़ दिया है। आज के धरना प्रदर्शन की विफलता धान खरीदी के मुद्दे पर भाजपा की दूसरी विफलता है। भाजपा के वरिष्ठ  नेता पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर द्वारा घोषित धान खरीदी को लेकर भात पर बात आंदोलन पूरी तरह से विफल रहा। प्रदेश में 2048 धान खरीदी केन्द्र है। भात पर बात का आंदोलन की संख्या दहाई भी पार नहीं कर सकी। भात पर बात का आंदोलन भाजपा के वरिष्ठ  नेता अजय चंद्राकर के गृह जिले धमतरी तक में भी नहीं हो पाया। धान खरीदी पर भाजपा को किसानों और ग्रामीण मतदाताओं ने समर्थन नहीं दिया। छत्तीसगढ़ के गांवों के लोग भाजपा के किसान विरोधी चरित्र को बखूबी समझ चुके है।

त्रिवेदी ने कहा है कि भाजपा को धरना तब करना था जब मोदी सरकार ने कहा था किसानों को 2500 रुपए मत दो। तब तो किसानों के लिए भाजपा चिट्ठी भी नहीं लिखी। आज के भाजपा के धरने से भाजपा की किसानों को लेकर की जा रही राजनीति और किसान विरोधी चरित्र दोनों  बेनकाब हुआ। भाजपा किसानों के साथ कभी नहीं रही है, अभी केवल घड़याली आंसू बहा रही है। जब किसानों को 2500 रूपए देने की बारी आई तो तब आगे-पीछे होने लगी और मुंह छिपाते फिर रही थी। त्रिवेदी ने कहा कि केन्द्र सरकार धान सहित विभिन्न फसलों की समर्थन मूल्य तय करती है। राज्य सरकार केन्द्र की ओर से धान खरीदती है। हम अपने राज्य के किसानों को राज्य सरकार के कोष से 25 सौ रूपए की अंतर की राशि देना चाहते थे लेकिन इसमें भी भारतीय जनता पार्टी को आपत्ति थी। बोनस राशि देने पर केन्द्र के द्वारा धान खरीदी के लिए राशि नहीं देने का फरमान सुना दिया। यहां तक कि किसानों को 2500 रूपए में धान खरीदी के लिए अपनी बात रखने के लिए मुख्यमंत्री बघेल प्रधानमंत्री से मिलना चाहते थे तब प्रधानमंत्री ने उन्हें मिलने का समय भी नहीं दिया। यह छत्तीसगढ़ के किसानों का सीधा अपमान है। इसे किसान हमेशा याद रखेंगे।

 

 

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