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मुख्य सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव कम करने कलेक्टर, एसपी ने किया कोयला खदानों का निरीक्षण

मुकेश पाण्डेय  | 13 Jun , 2019 10:26 AM
मुख्य सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव कम करने कलेक्टर, एसपी ने किया कोयला खदानों का निरीक्षण

कोरबा। कोरबा की मुख्य सड़कों पर कोयला खदानों से निकलने वाले भारी वाहनों का दबाव कम कर आमजनों को सुगम, सुरक्षित यातायात की सुविधा दिलाने के उद्देश्य से आज जिले की कलेक्टर किरण कौशल और पुलिस कप्तान जितेन्द्र सिंह मीणा ने कोयला खदान परिसरों का अलसुबह आकस्मिक निरीक्षण किया।  दोनों अधिकारी प्रशासन के अन्य अधिकारियों के साथ सबसे पहले कुसमुंडा कोयला खदान पहुंचे। उन्होंने खदान के अंदर कोयला ढोने वाले वाहनों के प्रवेश और निकासी की पूरी व्यवस्था का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया तथा एसईसीएल के अधिकारियों से जानकारी ली। कलेक्टर कौशल एवं एसपी मीणा ने कुसमुंडा के बेरियर क्रमांक एक और चार से खदान के अंदर प्रवेश किया। कनबेरी रोड का उपयोग करने वाले ट्रांसपोर्टर इन दोनों बेरियर का उपयोग कुसमुंडा खदान से कोल परिवहन के लिए करते हैं। एसईसीएल के अधिकारियों ने बताया कि कुसमुंडा खदान के बेरियर नंबर एक से प्रतिदिन लगभग 370 गाड़ियां और बेरियर क्रमांक चार से लगभग 350 गाड़ियां कोल परिवहन का कार्य करती हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि सरगुजा, बिलासपुर एवं रायपुर की ओर जाने वाली प्रतिदिन लगभग 340 गाड़ियां गेट नंबर तीन से कोल परिवहन करती हैं। बेरियर नंबर पांच से हरदीबाजार की ओर जाने वाली गाड़ियों का आवागमन होता है जो संख्या में प्रतिदिन साढ़े तीन सोै के आसपास हैं।

कलेक्टर एवं पुलिस कप्तान ने कनबेरी रोड पर प्रतिदिन चलने वाली लगभग 900 गाड़ियों में से कुछ गाड़ियों को वैकल्पिक सड़कों से चलाने का सुझाव एसईसीएल के अधिकारियों के बीच रखा। उपस्थित तहसीलदार श्री रोहित ठाकुर ने कलेक्टर को बताया कि कुसमुंडा खदान के बेरियर नंबर एक से बालको पावर प्लांट के लिए कोयला ले जाने वाली लगभग दो सौ गाड़ियां कनबेरी सड़क का उपयोग कर सर्वमंगला चैक होते हुए बालको तक पहुंचती हैं। इस पर कलेक्टर श्रीमती कौशल ने बालको पावर प्लांट के लिए कुसमुंडा खदान से निकलने वाली सभी गाड़ियों को दीपका होते हुए चाकाबुड़ा-जवाली-ढेलवाडीह बाईपास से कोरबा की तरफ मोड़ने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। गेवरा खदान का निरीक्षण करने के बाद कलेक्टर ने यह भी सुझाव रखा कि गेवरा खदान से निकलने वाली बालको की कोयला वाली गाड़ियों को भी इसी रूट पर डायवर्ट किया जा सकता है। जिससे कनबेरी रूट पर प्रतिदिन लगभग एक हजार गाड़ियों का दबाव कम हो सकता है।

टोकन पद्धति का कड़ाई से हो पालन- कलेक्टर कौशल ने एसईसीएल के अधिकारियों और ट्रांसपोर्टरों को खदान के भीतर कोयला लदान के लिए गाड़िया भेजने में लागू टोकन पद्धति का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश मौके पर ही दिये। अधिकारियों ने कलेक्टर को बताया कि भुट्टा चैक के पास कुसमुंडा माईंस के लक्ष्मण प्रोजेक्ट यार्ड पर हर दिन सात सौ से आठ सौ खाली गाड़ियां खड़ी होती हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस यार्ड में खड़ी होने वाली सभी गाड़ियां टोकन सिस्टम के आधार पर कुसमुंडा खदान में बेरियर नंबर एक, तीन एवं पांच से प्रवेश करती हैं। परंतु पहले आओ, पहल पाओ की टोकन प्राप्त करने की नीति का पालन ठीक से नहीं हो पा रहा है, इसलिये मुख्य मार्गों पर भारी वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि टोकन पद्धति का कड़ाई से पालन हो और जो गाड़ी पहले आये उसे पहले टोकन दिया जाये। टोकनों के आधार पर ही बेरियरों पर भी वाहनों का खदान में प्रवेश सुनिश्चित किया जाये।

एसईसीएल अधिकारियों की सर्वमंगला मंदिर के पास की नहर पर अतिरिक्त पुल बनाने की मांग-सर्वमंगला मंदिर से कनबेरी मार्ग के निरीक्षण के दौरान एसईसीएल के अधिकारियों ने सड़क के किनारे की नहर पर एक अतिरिक्त पुल बनाने की मांग की। एसईसीएल के अधिकारियों का मत था कि वर्तमान में बेरियर नंबर एक एवं चार से प्रवेश एवं निकासी करने वाली सभी गाड़ियों को एक ही पुल का उपयोग करना पड़ता है जिसके कारण कई बार कनबेरी मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। अधिकारियों का मत था कि नहर पर एक अतिरिक्त पुल बन जाने से कुसमुडा खदान के बेरियर नंबर चार से निकलने वाले वाहन रायगढ़ की तरफ सीधे निकल जायेंगे और सर्वमंगला मंदिर के पास वाहनों का दबाव कम होगा। कलेक्टर ने अधिकारियों की इस मांग पर विचार के लिए आगामी दिनों में बैठक कर निर्णय लेने की बात कही।

गेवरा खदान का निरीक्षण- कलेक्टर ने एसपी के साथ गेवरा खदान का भी निरीक्षण किया। वे गेवरा खदान के बेरियर क्रमांक एक, चार एवं पांच तक पहुंची और खदान से निकलने वाली गाड़ियों के मार्गों की जानकारी ली। एसईसीएल के अधिकारियों ने बताया कि खदान के बेरियर क्रमांक एक से प्रतिदिन लगभग सात सौ से साढ़े सात सौ गाड़ियों का आवागमन होता है। बेरियर क्रमांक एक एवं दो से गाड़ियां हरदीबाजार और हरदीबाजार से होकर बिलासपुर की ओर जाती हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि इन दोनों बेरियरों से निकलने वाली अधिकांश गाड़िया विभिन्न कोल वाशरियों को कोयला पहुंचाती हैं। गेवरा खदान की बेरियर क्रमांक तीन से प्रतिदिन लगभग दो सौ गाड़िया बिलासपुर, रायपुर और हरदीबाजार की ओर तथा बेरियर क्रमांक चार से लगभग ढाई सौ गाड़ियां कनबेरी सड़क की ओर से कोयले का परिवहन करती हैं। कलेक्टर ने खदान के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को काम करने वाले लोगों की सुरक्षा के सभी उपाय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कामगारों को सुरक्षा संबंधी उपकरण जैसे-हेलमेट, दास्ताने, जूते आदि का भी नियमित वितरण करने के निर्देश दिए।

दीपका खदान में सड़कों पर लगातार पानी छिडकाव और पर्याप्त वृक्षारोपण करने के भी निर्देश- कलेक्टर श्रीमती कौशल एवं पुलिस अधीक्षक श्री जितेन्द्र सिंह मीणा ने दीपका खदान के निरीक्षण के दौरान सड़कों पर चलने वाले भारी वाहनों से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए लगातार पानी छिड़काव करने के निर्देश दिए। श्रीमती कौशल ने सड़कों के आसपास और खदान से निकली मिट्टी के टीलों पर मानसून के दौरान पर्याप्त वृ़क्षारोपण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। एसईसीएल के अधिकारियों ने कलेक्टर एवं एसपी को बताया कि दीपका खदान से कोयले का अधिकतम परिवहन रेल के माध्यम से होता है। गाड़ियां खदान के परिसर में ही डम्पिंग एरिया और वाशरियों तक कोयला परिवहन के लिए चलती हैं। एसपी श्री मीणा ने खदानों में कोयला चोरी और गाड़ियों से डीजल चोरी रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम करने के निर्देश एसईसीएल के अधिकारियों और सीआईएसएफ के अधिकारियों को दिए। श्री मीणा ने कहा कि खदान क्षेत्रों में कोयला और डीजल की चोरी की मामलों से प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था का बड़ा प्रश्न खड़ा होता है। इसलिए एसईसीएल को ऐसी घटनाएं रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम करना चाहिए।