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विश्व रेडियो दिवस: यहूदी शरणार्थी ने बनाई थी आकाशवाणी धुन

ग्लिब्स टीम  | 13 Feb , 2020 04:41 PM
विश्व रेडियो दिवस: यहूदी शरणार्थी ने बनाई थी आकाशवाणी धुन

नई दिल्ली। पीढ़ियां व समय बदलता है, लेकिन यादें हमेशा ठहरी हुई रहती है। कुछ ऐसा ही गुरुवार 13 फरवरी का दिन है। यह दिन 'वर्ल्ड रेडियो डे' के नाम से जाना जाता है। भारत में जब भी रेडियो की बात होती है, सबसे पहले नाम ऑल इंडिया रेडियो आता है। याद आती है ऑल इंडिया रेडियो की वो धुन, जिसकें  बिना कभी हमारी सुबह की शुरुआत नहीं हुआ करती थी। जो सुबह की पहली किरण के साथ रेडियो पर बजती थी। करोड़ों लोग इस धुन को पहचानते होंगे, लेकिन कुछ ही लोगों को ही पता है कि ये धुन किसी भारतीय ने नहीं बनाई थी। जर्मनी में हिटलर द्वारा किए गए यहूदियों के नरसंहार से इसकी कहानी शुरू होती है। एक यहूदी शरणार्थी ने ऑल इंडिया रेडियो के लिए ये धुन बनाई थी। उनका नाम था - वॉल्टर कॉफमैन। राग शिवारंजिनी पर आधारित, तम्बूरे के पीछे लयबद्ध वायलिन के स्वर आज भी ब्लैक एंड व्हाइट जमाने की यादें ताजा कर देते हैं। 

 

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