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क्या अब बैंकों पर भरोसा कर पाएगी जनता...?  

राहुल चौबे  | 15 Oct , 2019 04:21 PM
क्या अब बैंकों पर भरोसा कर पाएगी जनता...?  

मुंबई। पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक के 51 वर्षीय संजय गुलाटी का जमाकर्ताओं द्वारा विरोध रैली में हिस्सा लेने के बाद निधन हो गया। संजय गुलाटी के निधन पर राजनीतिक विश्लेषक और समाजसेवी प्रकाशपुंज पाण्डेय ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा है कि इस पीड़ा की घड़ी में शोकाकुल परिवार को इस भारी दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन जवाब दें कि देश में आए दिन बैंकों के स्कैम (घोटाले) सामने आ रहे है,जिससे आम जनता की जमा पूँजी एक झटके में खत्म हो रही है या खतरे में पड़ रही है। संजय गुलाटी जैसे कितने लोग ही इस घोटालें के भेंट चढ़ रही हैं। आखिर इनका क्या कसूर है, जो ये सब आम जनता को झेलना पड़ रहा है। आगे वे कहते हैं कि एक तरफ केंद्र योजना और जागरूकता अभियान के तहत लोगों को जागरूक कर रही है कि आप अपने पैसे बैंक में रखे और डिजिटल लेन-देन करे और ऐसे में कई लोग ऑनलाइन ठगी या फिर इस तरह के बैंक घोटालों में बर्बाद हो रहे हैं। इस तरह से बैंक घोटालों से अपनी जिंदगी से हाथ धो रहे हैं। संजय गुलाटी ने भी पीएमसी में 90 लाख रुपये जमा कर रखे थे, घोटाले की ख़बर सुनते ही उनके होश फाख्ता हो गए। संजय निवेशकों के साथ सोमवार को एक रैली में शामिल हुए थे। उन्होंने वहाँ निवेशकों को रोते हुए, पैसे लौटाने के लिए गिड़गिड़ाते हुए देखा। लोगों के दिल में भरी टीस देखने के बाद जब वह घर लौटे तो कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई।

बैंक के इस घोटाले के लिए कौन जिम्मेदार है...?
नोट-बंदी के समय भी देशभर में न जाने कितने लोगों ने अपनी जान बैंकों की लंबी लंबी-लंबी लाइनों में लग कर गवाँ दी, जिसकी ज़िम्मेदारी भी अभी तय होना बाकी है और उसके बाद से लगातार इस तरह बैंक घोटालों की ख़बरें आ रही हैं। कुछ व्यापारी, सरकारी सांठगांठ से बैंकों का पैसा लेकर मोदी सरकार के नाक के नीचे से विदेश भाग जाते हैं और सरकार मूक दर्शक बने देखती रही। प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने सवाल उठाया है कि अब जनता जानना चाहती है कि केंद्र सरकार और वित्त मंत्री जनता के पैसों को सुरक्षित रखने के लिए कौन से नए नियम ला रही है, जिससे इस तरह से जनता के पैसे न डूबे और न ही इस वजह से किसी निर्दोष की जान जाए। यह सरकार को स्पष्ट करना होगा।

 

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