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कौन था जॉर्ज फ्लॉयड, जिसकी मौत के बाद अमेरिका के 40 शहरों में लगाना पड़ा कर्फ्यू

ग्लिब्स टीम  | 03 Jun , 2020 03:05 PM
कौन था जॉर्ज फ्लॉयड, जिसकी मौत के बाद अमेरिका के 40 शहरों में लगाना पड़ा कर्फ्यू

नई दिल्ली। अफ्रीकी मूल के अमरीकी नागरिक जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद हो रहे प्रदर्शनों से निपटने के लिए अमरीका के कई शहरों में कर्फ्यू लगाया जा रहा है। फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के खिलाफ हो रहे हिंसक प्रदर्शनों की वजह से देश में हालात बिगड़ गए हैं।

क्या है पूरा मामला :

एक काले शख्स की पुलिस हिरासत में मौत से तमाम अमरीकी ग़ुस्से में हैं। व्यापक पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। कई जगहों पर इन प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है और प्रशासन को राजधानी वॉशिंगटन समेत कई बड़े शहरों में कर्फ्यू तक लगाना पड़ा है। दरअसल 25 मई का ही वह दिन था जब मिनेसोटा अस्पताल में जॉर्ज फ्लॉयड नामक एक अश्वेत व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत हो गई और जिसके लिए एक क्रूर अमेरिकी पुलिस को जिम्मेदार माना गया। क्रूर अमेरिकी पुलिस अधिकारी को मृतक जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन पर अपने घुटने टिकाए वायरल हुए एक वीडियो में देखा गया था। घटना के लिए जिम्मेदार ठहराए जा रहे मिनियापोलिस पुलिस विभाग के अधिकारी डेरेक चौविन करीब 9 मिनट तक जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन पर अपना घुटना टिकाए रखता है, जिससे सांस लेने की तकलीफ से गुजर रहा जॉर्ज फ्लॉयड वीडियो में चिल्लाता हुआ कहता है, मैं सांस नहीं ले सकता हूं और कुछ ही देर बाद ही उसकी हालत खराब हो जाती है और अस्पताल ले जाते हुए उसकी दर्दनाक मौत हो जाती है। 

इसी बीच परिवार की ओर से कराए गए जॉर्ज फ़्लॉयड के पोस्टमॉर्टम में उनकी मौत की वजह ऑक्सीजन की कमी बताई गई है। परिवार की ओर से जॉर्ज फ़्लॉयड का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि ‘गले और कमर पर दबाव पड़ने’ की वजह से उनकी मौत हुई।
मिनियापोलिस पुलिस के अधिकारी ने कई मिनट तक फ़्लॉयड की गर्दन को घुटने से दबाए रखा था। परिवार की ओर से कराए गए इस पोस्टमॉर्टम के नतीजे सरकारी पोस्टमॉर्टम के नतीजों से अलग हैं। काउंटी मेडिकल एग्ज़ामिनर की ओर से कराए गए पोस्टमार्टम में गला दबाए जाने या ऑक्सीजन की कमी होने की पुष्टि नहीं की गई थी। आधिकारिक पोस्टमार्ट में उनकी मौत को होमीसाइड या हत्या कहा गया है।

जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद शुरू हुए प्रदर्शन अमरीका के कई शहरों में फैल गए हैं। वॉशिंगटन में तो प्रदर्शनकारी व्हाइट हाउस के बाहर भी इकट्ठा हो गए। अमरीका के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए और कई जगह काफ़ी हिंसा हुई। करीब 40 शहरों में कर्फ़्यू लगा दिया गया है, लेकिन लोगों ने इसकी अनदेखी की और सड़कों पर उतर आए। इस कारण तनाव काफ़ी बढ़ गया है। न्यूयॉर्क, शिकागो, फिलाडेल्फिया और लॉस एंजेलेस में दंगा पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष हुआ। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रांतीय गवर्नरों को चेतावनी देते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों से सख़्ती से निबटा जाए। एक वीडियो कांफ्रेंस में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि हाल के दशकों की सबसे ख़राब नस्लीय और नागरिक अशांति की कुछ घटनाओं पर गवर्नरों की प्रतिक्रिया कमज़ोर रही है। ट्रंप ने कहा था कि गवर्नर हिसंक प्रदर्शनों पर हावी हों। ट्रंप के इस बयान पर विवाद होने के बाद व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने कहा है कि इस बयान का ग़लत मतलब निकाला जा रहा है।

ट्रंप की प्रवक्ता केयली मैकइनैनी ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप के कहने का मतलब ये था कि गवर्नर नेशनल गार्ड पर ज़्यादा निर्भर रहें। राष्ट्रपति ट्रंप ने हिंसा के लिए वामपंथी कट्टरपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराया है। वहीं आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं। न्यू यॉर्क में लूटमार और संपत्तियों को नुक़सान पहुंचाए जाने की घटनाओं के बाद गवर्नर एंड्र्यू क्यूमो और मेयर बिल डे ब्लासियो ने कर्फ़्यू लगा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान को रोकने के लिए पुलिस की मौजूदगी को दोगुना किया जाएगा।

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