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घर पर ही रहकर लाइव देखें खप्पर, glibs.in पर सीधे मातारानी की दर्शन करें...

दीपक ठाकुर  | 24 Oct , 2020 03:25 PM
घर पर ही रहकर लाइव देखें खप्पर, glibs.in पर सीधे मातारानी की दर्शन करें...

कवर्धा। भारतवर्ष में देवी मंदिरों से खप्पर निकालने की परंपरा वर्षों पुरानी है। देश में कलकत्ता के बाद छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और कवर्धा में ही खप्पर निकालने की परंपरा रही है। जानकारों के मुताबिक यह परपंरा देशभर में केवल कवर्धा में बची हुई है। आपदाओं से बचाने प्रति नवरात्र अष्टमी के मध्यरात्रि धधकती आग व चमचमाती तलवार लेकर खप्पर स्वरूप माता नगर भ्रमण को निकलती है। लेकिन कोरोना काल में यह पुरातन धार्मिक परम्परा प्रशासनिक नियमों के चलते इस नवरात्र अष्टमी को खप्पर निकलेगी जिसे आम आदमी नहीं देख सकता। कोरोना को देखते हुए भीड़ न लगे इसके लिए लोगों की देखनी की अनुमति नहीं दी गई है। लेकिन लोगों को सीधे रात में ही लाइव खप्पर दर्शन कराएगी। इसके लिए हमारे यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/c/GlibsMedia पर सीधे खप्पर लाइव देख सकते हैं।

आपदाओं से क्षेत्र को सुरक्षित रखना उद्देश्य :
महामारी व आपदाओं से मुक्ति दिलाने व नगर मेंं विराजमान देवी-देवताओं का रीति रिवाज के अनुरूप मान मनव्वल कर सर्वे भवन्तु सुखिन: की भावना स्थापित करना खप्पर के नगर भ्रमण का मुख्य उद्देश्य है। प्रत्येक नवरात्रि पक्ष के अष्टमी के मध्य रात्रि ठीक 12 बजे दैविक शक्ति से प्रभावित होते ही समीपस्थ बह रही सकरी नदी के नियत घाट पर स्नान के बाद द्रुतगति से पुन: वापस आकर स्थापित आदिशक्ति देवी की मूर्ति के समक्ष बैठकर उपस्थित पंडों से श्रृंगार करवाया जाता है। स्थान के पूर्व लगभग 10.30 बजे से ही माता की सेवा में लगे पण्डों ने परंपरानुसार 7 काल 182 देवी देवता और 151 वीर बैतालों की मंत्रोच्चारणों के साथ आमंत्रित कर अग्नि से प्रज्जवलित मिट्टी के पात्र(खप्पर) में विराजमान किया जाता है। इसके बाद खप्पर मंदिर से निकाली जाती है। जो नगर भ्रमण करती है। इस बार खप्पर आप यूट्यूब पर https://www.youtube.com/c/GlibsMedia खोल कर खप्पर के दर्शन कर सकते हैं।

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