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जंगल जमीन पर आदिवासी समुदाय का हक हैं : विक्रम मंडावी

कुशल चोपड़ा  | 09 Aug , 2020 06:16 PM
जंगल जमीन पर आदिवासी समुदाय का हक हैं : विक्रम मंडावी

बीजापुर। नगरीय क्षेत्रों में शासकीय ज़मीनों के विक्रय व पांचवीं अनुसूची का पालन न करने को लेकर आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने नाराजगी जाहिर की है। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बीजापुर स्थित गोंडवाना भवन में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने परिचर्चा  आयोजित कर राज्यपाल,राष्ट्रपति व प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।समाज प्रमुखों की चर्चा में नजूल भूमि को शुल्क दे कर पट्टा आबंटित करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(1) पाँचवी अनुसूची के उलंघन पर नाराजगी जाहिर की है। साथ ही श्रीराम पथ गमन के नाम पर बस्तर के सांस्कृतिक सामाजिक ऐतिहासिक एवमं रूढ़ि प्रथा परम्परा पर सीधा  हमला बताया।  जेल में बंद सैकड़ों निर्दोष आदिवासियों को रिहा करने व बस्तर में आदिवासी विश्वविद्यालय की स्थापना व अल्प वर्षा के कारण क्षेत्र को सूखा ग्रस्त इलाका घोषित किये जाने की मांग पर चर्चा की गई।कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियाम, नीना रावतिया उद्दे, लक्ष्मी नारायण गोटा,कांग्रेस जिला अध्यक्ष लालू राठौर, कामेश्वर दुब्बा, हरिकृष्ण कोरसा, गुज्ज़ा पवार, बीएल पदमाकर, डॉ बीआर पुजारी, डॉ.अरुण सकनी,मंगल राना, राधिका तेलम, कमलेश कारम, सोनू पोट्टम, कमलेश पैंकरा, दसरथ कश्यप, राकेश गिरी,आदिनारायण पुजारी, पोचे राम भगत, अमित कोरसा, सुशील हेमला विनय उइके मौजूद थे।

बीजापुर विधायक व बस्तर विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष विक्रम मण्डावी ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस के माध्यम अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। विक्रम ने कहा कि जल जंगल जमीन पर आदिवासी समुदाय का नैसर्गिक हक है और प्रदेश सरकार लगातार आदिवासियों के हक के लिए कार्य कर रही है। आज पट्टा वितरण कार्य मे जिले के 1500 परिवारों को पट्टा तैयार किया गया। बीजापुर जिले में बंद 51 बंद स्कूलों को शुरू किया गया, दूरस्थ अंचल के गांवों में पेयजल के लिए बोर कराए गए है। सरकार बुनियादी सुविधाओं को जनजन तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। बीजापुर जिले के नगरीय क्षेत्रों में नजूल भूमि पर अतिक्रमण पर पट्टा समाज के विरोध के कारण अभी लंबित है। 

 

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