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सीमावर्ती बालोद इलाके में बाघ की धमक, ग्रामीणों में दहशत, वन अमला सर्तक

नरेश भीमगज  | 08 Jan , 2020 08:09 PM
सीमावर्ती बालोद इलाके में बाघ की धमक, ग्रामीणों में दहशत, वन अमला सर्तक

कांकेर। जिले के सीमावर्ती बालोद इलाके में बाघ देखे जाने के बाद से क्षेत्र में दहशत व्याप्त है।  बाघ लगातार वन अमले को चकमा देकर वहां से निकलने में सफल हो जा रहा है। बालोद से कांकेर की सीमा जुड़े होने के कारण वन अमला मुस्तैद है और लगातार गश्त करते हुए आसपास के गांवों में मुनादी करा रहा है। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक जिले में बाघ देखे जाने की पुष्टि नहीं की है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाघ के पद चिन्ह बालोद जिले के गंगारी और करहीभदर में देखे गये है। इसके बाद से वन अमले को बाघ अब तक नजर नहीं आया है। ज्ञात हो कि राजनांदगांव-बालोद सीमा में कई दिनों से विचरण करने के बाद बालोद होते बाघ कांकेर जिले की ओर बढ़ रहा है। बालोद जिले से कांकेर की सीमा लगी होने के कारण वन अमला सर्तक है। वन विभाग के भानुप्रतापपुर रेंज के डीएफओ का कहना है कि बाघ अभी कांकेर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में नहीं पहुंचा है। लेकिन बालोद जिले की सीमा से लगे होने के कारण वन विभाग सर्तक है। बाघ लगातार आगे बढ़ रहा है और कभी भी जिले में प्रवेश कर सकता है। इसे लेकर लगातार सप्ताहभर से मुनादी करा कर लोगों को सर्तक किया जा रहा है। भानुप्रतापपुर कच्चे के आसपास बाघ देखे जाने की आशंका के बाद यहीं ज्यादा नजर रखी जा रही है। वन विभाग द्वारा लोगों से अपील की जा रही है कि लोग अकेले जंगल की ओर ना जाये, रात में अकेले न घूमे, शौच के लिए बाहर न निकले, जहां कहीं भी बाघ दिखे तत्काल वन विभाग को सूचित करे। इस संबंध में लगातार वन विभाग की टीम के साथ एरिया पर गश्त भी किया जा रहा है। रात्रि सहित दिन में भी नजर रखी जा रही है। हालांकि बाघ अब तक किसी इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाया है लेकिन फिर भी ऐहतियात के तौर पर लोगों को सुरक्षा के लिए मुनादी करा सूचित किया जा रहा है।
वर्जन
बाघ अभी जिले में नहीं पहुंचा है। कांकेर जिला सीमावर्ती जिला बालोद  से लगा होने के कारण ऐहतिहात के तैर पर सप्ताह भर से मुनादी कराकर लोगों को सूचित किया जा रहा है। लगातार गश्त कर संभावित एरिया में निगरनी रखी जा रही है।
रमेश दुग्गा, डीएफओ भानुप्रतापपुर

 

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