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प्यार की न सीमा होती है न बंधन, ये सदियों से चला आ रहा है जो किसी भाषा का मोहताज़ नहीं निगाहों से ही बयां हो जाता है

यामिनी दुबे  | 14 Feb , 2020 02:31 PM
प्यार की न सीमा होती है न बंधन, ये सदियों से चला आ रहा है जो किसी भाषा का मोहताज़ नहीं निगाहों से ही बयां हो जाता है

रायपुर। इश्क़,प्यार, मुहब्बत, प्रेम सब एक ही भावना के अलग-अलग नाम है जो किसी धर्म, जाति, वर्ग या किसी भी प्रकार के बंधन और सीमा से मुक्त है। ये बेमिसाल प्यार है जो अपने प्रीतम-प्रियतम के प्रति अटूट श्रद्धा लगाव और चाहत का प्रतीक है। ये भी भक्ति का ही एक अलग तरीका है, जिसमें आधुनिक तौर-तरीके शामिल हो गए है। राधा और मीरा ने भी प्रेम के अनुपम व अनुकरणीय उदाहरण पेश किए। ग़ालिब ने भी इश्क़ को अपनी कलम से नई ऊंचाइयां दी और अब वेस्टर्न कल्चर उसे नए-नए तौर तरीके दे रही है। फरवरी यानी इश्क़, प्यार, मुहब्बत का मौसम इज़हार-ए-इश्क़ का महीना और वैलेन्टाइन वीक का खुशनुमा दौर। चारों ओर इश्क़ की बयार है। हर ओर छाया प्यार ही प्यार है और ऐसे में लोग प्यार का खुशी-खुशी इज़हार कर रहे है। शादी शुदा लोग भी अपने प्यार के सुनहरे दिनों को याद कर रहे है।सच ही तो है न उम्र की सीमा हो न जन्म का हो बंधन जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन, जन्म-जन्मों का साथ निभाने का वादा करने का दिन है वैलेंटाइन डे।

 

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