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परपीड़ा की अनुभूति ही सामाजिक सेवा कार्यों की पहली शर्त और सीढ़ी : डॉ. नेरल

रविशंकर शर्मा  | 03 Jul , 2020 10:12 PM
परपीड़ा की अनुभूति ही सामाजिक सेवा कार्यों की पहली शर्त और सीढ़ी : डॉ. नेरल

रायपुर। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग 3 से 9 जुलाई तक प्राध्यापकों, शोध विद्यार्थियों और अन्य छात्र-छात्राओं के लिए विभिन्न विषयों पर ऑनलाइन ई-लेक्चर श्रृंखला इंद्रधनुष का आयोजन कर रहा है। पहले दिन शुक्रवार को पं.जवाहरलाल नेहरु स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के पैथोलॉजी एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्राध्यापक और विभागाध्यक्ष डॉ.अरविन्द नेरल ने जीना इसी का नाम है,विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के रोकथाम, बचाव व आवश्यक सावधानी रखने के संबंध में भी व्याख्यान दिए। उन्होंने कहा कि जुल्फें संवारने से बात नहीं बनेगी,चलिए किसी की जिंदगी संवारेंगे। परपीड़ा की अनुभूति ही सामाजिक सेवा कार्यों की पहली शर्त और पहली सीढ़ी है। श्रीमद्भगवत गीता, रामायण, स्वामी विवेकानंद, दलाईनामा,मदर टेरेसा,डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम, मार्क जुकरबर्ग, मार्टीन लूथर किंग (जूनि.) आदि के उदाहरण और उनके ओर से किए गए उत्साहवर्धक सूत्र वाक्यों के माध्यम से अपने व्याख्यान को आकर्षक और सुरूचिपूर्ण बनाया। समय प्रबंधन, सामूहिक उत्तरदायित्व, टीम-भावना और श्रम विभाजन के सिद्धांतों को डॉ.नेरल ने बड़े रोचक ढंग से पीपीटी के माध्यम से समझाया। व्याख्यान के प्रारंभ में इंद्रधनुष के संयोजक डॉ.प्रशांत श्रीवास्तव ने डॉ.अरविन्द नेरल का परिचय दिया और अंत में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ.सीएल देवांगन से धन्यवाद दिया। कुलपति डॉ. अरूणा पल्टा ने इस व्याख्यान की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी प्रस्तुति से छात्र-छात्राओं में ऑनलाइन अध्ययन के लिए रूचि बढ़ेगी और इस प्रेरक उद्बोधन से युवा वर्ग सामाजिक सेवा कार्यों के लिए उत्साहित होंगे। विश्वविद्यालय के लगभग 400 विद्यार्थियों ने इसमें ऑनलाइन भाग लिया।

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