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सड़क दुर्घटना में घायल मरीज का फेफड़ा और दिल बाहर आया, टाइटेनियम की नई पसली बनाकर दिया नया जीवन

राहुल चौबे  | 03 Jun , 2020 04:13 PM
सड़क दुर्घटना में घायल मरीज का फेफड़ा और दिल बाहर आया, टाइटेनियम की नई पसली बनाकर दिया नया जीवन

रायपुर। पं.जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकत्सालय के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट के अंतर्गत संचालित कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने सड़क दुर्घटना में घायल एक 23 वर्षीय युवक की जटिल सर्जरी करके दुर्घटना में टूटकर चकनाचूर हो चुकीं पसलियों की जगह टाइटेनियम की नई पसली लगाकर नया जीवन प्रदान किया। यह हादसा इतना दर्दनाक था कि मरीज के फेफड़े एवं हृदय तक बाहर निकल आये। एसीआई के हार्ट, चेस्ट, वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू, डीकेएस के प्लास्टिक सर्जन डॉ. कृष्णानंद ध्रुव एवं टीम के नेतृत्व में इस नवयुवक का इलाज हुआ। डॉक्टरों ने इस आधुनिकतम सर्जरी में दुर्घटना के कारण क्षतिग्रस्त पसली की जगह में टाइटेनियम प्लेट की सहायता से नई पसली का निर्माण किया। सर्जरी इतनी सफल रही कि मरीज को अपेक्षाकृत बेहद कम समय में ही वेंटिलेटर से बाहर निकाल लिया गया।


 22 एवं 23 मई की दरम्यानी रात एक आइल डिपो में काम करने वाला चरौदा निवासी 23 वर्षीय नवयुवक अपने मित्र के साथ मोटर सायकल पर आरंग की ओर जा रहा था। तभी तेज़ रफ़्तार से आती हुई ट्रक ने जोर से ठोकर मारी,जिससे मोटर सायकल चालक ट्रक के नीचे राड में फंसकर घसीटता चला गया,जिससे कारण उसके बायें फेफड़े की पसलियां पूरी तरह चकनाचूर हो गईं। पसली का टुकड़ा बाहर रोड में बिखर गया। चोट इतनी गहरी थी कि मरीज का फेफड़ा एवं दिल छाती से बाहर आ गया। घायल युवक को संजीवनी 108 एम्बुलेंस की सहायता से मेकाहारा के ट्रामा सेंटर में लाया गया। यहां आपातकाल में उपस्थित डॉक्टरों द्वारा उपचार किया गया। हादसे में खून बहुत बह चुका था इसलिये उसको खून चढ़ाया गया। मरीज की हालत को हीमोडायनामिकली स्थिर ( Hemodynamically stable / जीवन रक्षक उपकरणों की सहायता से हृदय एवं रक्त वाहिकाओं में रक्त प्रवाह एवं सामान्य अंगों को स्थिर बनाये रखने की प्रक्रिया) किया गया।

मरीज की स्थिति को देखते हुए आपात चिकित्सा से फौरन हार्ट एवं चेस्ट सर्जन डॉक्टर कृष्णकांत साहू को सूचना दी गई। डॉ. साहू ने मरीज की स्थिति को भांपकर तुरंत ऑपरेशन की योजना बनायी। इस ऑपरेशन में उन्होंने डीकेएस के प्लास्टिक सर्जन डॉ. कृष्णानंद ध्रुव को शामिल किया क्योंकि छाती में पसली के साथ-साथ चमड़ी में बहुत बड़ा गेप था,जिसको सामान्य तरीके से नहीं भरा जा सकता था। इसके लिये प्लास्टिक सर्जन का होना जरूरी है। मरीज का सीटी-स्कैन कराकर अंदरूनी चोटों को देखा गया। स्थिति स्थिर होने पर उसको ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया एवं बहुत ही हाईरिस्क एवं डेथ ऑन टेबल कंसेट लिया गया। मरीज के ऑपरेशन में जो पसलियां (6-7-8-9-10-11) गायब हो गयी थी उसके स्थान पर डॉ. कृष्णकांत साहू ने टाइटेनियम की नई पसली बनाई। पसली बनाने के लिये लगभग 15-17 सेंटीमीटर लम्बाई की चार टाइटेनियम प्लेट का उपयोग किया गया। ऑपरेशन से पूर्व घाव को धोकर अच्छी तरह से साफ किया गया क्योंकि फेफड़े के अंदर बहुत ज्यादा मिट्टी एवं कंकड़ घुस गया था।

बायें फेफड़े में छेद हो गया था एवं फट गया था,जिसको रिपेयर किया गया। डायफ्रॉम भी फट गया था इसे भी रिपेयर किया गया। इस ऑपरेशन में सबसे बड़ी समस्या घाव को बंद करने की थी क्योंकि दुर्घटना में छाती की चमड़ी कट कर गायब हो गयी थी,जिसको प्लास्टिक सर्जन डॉ. ध्रुव ने आस-पास की चमड़ी एवं मांसपेशियों को मोबलाइज (Mobilize) करके छाती में आये गेप को भरा। टाइटेनियम प्लेट का उपयोग करने से मरीज वेंटीलेटर से जल्दी बाहर आ गया एवं छाती बेडौल होने से बच गयी। कृत्रिम पसली नहीं लगायी जाती तो मरीज को वेंटीलेटर से बाहर निकालना बहुत ही मुश्किल हो जाता। ऑपरेशन में चार घंटे से ज्यादा का समय लगा एवं तीन यूनिट रक्त मरीज को लगा। आज मरीज पूर्णतः स्वस्थ्य होकर डिस्चार्ज होने वाला है। इस सर्जरी में रेडियोडायग्नोसिस विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। एसीआई में सभी प्रकार की आधुनिकतम पद्धति से फेफड़ों एवं खून की नसों का उपचार होने लगा है। निकट भविष्य में ओपन हार्ट सर्जरी एवं बायपास सर्जरी प्रारंभ होने की संभावना है।

टीम में ये रहे शामिल :

हार्ट,चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ.कृष्णकांत साहू(विभागाध्यक्ष),डॉ.निशांत चंदेल, डॉ.अश्विन जैन (सर्जरी रेसीडेंट), प्लास्टिक सर्जन-डॉ. कृष्णानंद ध्रुव, एनेस्थेटिस्ट एवं क्रिटिकल केयर-डॉ. अरुणाभ मुखर्जी एवं टीम, नर्सिंग स्टॉफ- राजेन्द्र, चोवाराम।

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