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बजट का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीण और अर्धशहरी अर्थव्यवस्था पर, प्रदेश के लिए संतुलित: छत्तीसगढ़ कैट

बजट का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीण और अर्धशहरी अर्थव्यवस्था पर, प्रदेश के लिए संतुलित: छत्तीसगढ़ कैट

रायपुर। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष अमर परवानी, कार्यकारी अध्यक्ष मंगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोषी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल और प्रदेश मीडिया प्रभारी संजय चौबे ने बताया कि राज्य बजट का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीण और अर्धशहरी अर्थव्यवस्था पर है। कैट ने राज्य सरकार को यूरोप के कई देशों की तर्ज पर इससे पहले रूरल इंडस्ट्रियल पार्क पर सुझाव सौंपा था। बजट में इस कॉन्सेप्ट को शामिल किया गया है, लेकिन शहरी क्षेत्रों के छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए कई मांगें जो कि अधूरी रह गई। जिसमें हर जिलों में थोक बाजारों की स्थापना, ई-कॉमर्स पॉलिसी पर ठोस नीति आदि को शामिल नहीं किया गया। कैट ने मांग रखी है कि रिटेल बाजार में ई-कॉमर्स के बढ़ते दुष्प्रभाव के लिए राज्य सरकार को ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता है। हमारी लगातार मांग है कि खुदरा व्यापार पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दबाव बढ़ते जा रहा है। इससे छोटे और मध्यम वर्ग के कारोबारी बुरी तरह प्रभावित है। इसके लिए हमे घरेलू व्यापार को प्रोत्साहित करना होगा।

बजट में राज्य सरकार ने इसके लिए प्रयास तो किए हैं, लेकिन सीधे तौर पर ई-कॉमर्स कंपनियों पर लगाम लगाने के लिए और कड़े फैसले लेने होंगे। हर जिलों में थोक बाजारों की स्थापना के लिए भूमि चिन्हित करना और होलसेल कॉरीडोर की स्थापना की मांग की गई है। कैट के जरिए एक बार फिर इन मांगों को लेकर राज्य सरकार से बातचीत की जाएगी। राज्य सरकार ने नए औद्योगिक क्षेत्र के लिए बजट में प्रस्ताव किया है। साथ ही वर्तमान औद्योगिक क्षेत्रों में अधोसंरचना की बेहतरी के लिए भी काम किए जाएंगे। अधोसंरचना के लिए की गई घोषणाओं से इसका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष प्रभाव बाजार पर पड़ने की संभावना है। छत्तीसगढ़ के कला, शिल्प, वनोपज, कृषि और अन्य सभी प्रकार के उत्पादों के लिए सी-मार्ट स्टोर की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्रों में अर्थव्यवस्था की नई क्रांति आएगी। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट माना के पुराने टर्मिनल बिल्डिंग को एयर कार्गों के रूप में विकसित करने के प्रयासों से छत्तीसगढ़ से अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। हमारी मांग है कि एयर कार्गों के विकसित होने के बाद एयरपोर्ट पर कस्टम क्लियरेंस की सभी सुविधाएं होनी चाहिए, ताकि एयर कार्गों हब का सपना पूरा हो सके। जगदलपुर, बिलासपुर के बाद अब अंबिकापुर और कोरिया में एयरपोर्ट की दिशा में प्रयासों से भी व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।

 

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