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मीसा बंदियों के भौतिक सत्यापन तक उन्हें मिलने वाली सम्मान निधि की रकम पर रोक

ग्लिब्स टीम  | 30 Jan , 2019 09:27 AM
मीसा बंदियों के भौतिक सत्यापन तक उन्हें मिलने वाली सम्मान निधि की रकम पर रोक

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने मीसा बंदियों के भौतिक सत्यापन तक उन्हें दी जाने वाली सम्मान निधि की राशि पर रोक लगा दी है। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को यहां बताया कि राज्य सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों (मीसा बंदियों) का भौतिक सत्यापन करने और उन्हें दी जाने वाली सम्मान निधि के भुगतान की प्रक्रिया का पुनर्निधारण करने का फैसला किया है। इसके लिए आगामी फरवरी माह से इस राशि के वितरण पर रोक लगा दी गई है। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लोक नायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि, 2008 के प्रावधानों के तहत लोकतंत्र सेनानियों को भुगतान की जाने वाली सम्मान निधि की राशि का समुचित नियमन करने और भुगतान की वर्तमान प्रक्रिया को और अधिक सटीक, पारदर्शी बनाया जाना आवश्यक है। साथ ही राज्य में लोकतंत्र सेनानियों का भौतिक सत्यापन कराया जाना भी आवश्यक है। अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यवाही के बाद ही लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान निधि की राशि दी जाएगी। इधर लोकतंत्र सेनानियों ने इसे लेकर सरकार की नीयत पर सवाल उठाया है।

बंद करना जरूरी नहीं है

लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने कहा है कि सरकार ने सत्यापन की बात कही है। सत्यापन के लिए इसे बंद करना जरूरी नहीं है। यदि सरकार की नीयत सत्यापन की होती तब बंद नहीं करते। बंद किए बिना भी सत्यापन शासकीय स्तर पर किया जा सकता है। इसके पीछे सरकार की नीयत ठीक नहीं दिख रही है। साथ ही इसमें अवधि भी नहीं दी गई है। उपासने ने कहा कि यदि ऐसा सोचा जा रहा है कि इसमें केवल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ या भारतीय जनता पार्टी के लोग हैं तब यह सही नहीं है। इसमें समाजवादी और कांग्रेस के लोग भी हैं। साथ ही इसमें वकील, समाजसेवी और पत्रकार भी हैं।

जेल अवधि के आधार पर रकम

मीसा बंदियों को राज्य में वर्ष 2008 से सम्मान निधि की राशि दी जा रही है। जो तीन महीने जेल में रहे उन्हें 10 हजार रूपए, जो तीन से छह महीने तक जेल में रहे उन्हें 15 हजार रूपए तथा छह माह से अधिक जेल में रहे उन्हें 25 हजार रूपए सम्मान निधि की राशि मिलती है। राज्य में सम्मान निधि पाने वालों की संख्या लगभग तीन सौ है। जिनमें से अधिकांश लोगों का निधन हो चुका है। जिनकी विधवाओं को आधी राशि मिल रही है। इनमें से ज्यादातर बुजुर्ग हैं और उनका इलाज कर चल रहा है। इसे बंद करने पर दवाइयों के अभाव में उनकी हालत खराब हो सकती है। 

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