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विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष- गर्भवती होकर भी जन सेवा में जुटी स्वाति, क्वॉरेंटाइन में 53 लोगों की है जिम्मेदारी 

राहुल चौबे  | 06 Apr , 2020 04:24 PM
विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष- गर्भवती होकर भी जन सेवा में जुटी स्वाति, क्वॉरेंटाइन में 53 लोगों की है जिम्मेदारी 

रायपुर। कोरोना वायरस महामारी से समुदाय को बचाने के लिए स्वातिपाल ने अपने कर्तव्य के आगे निजी सुख सुविधाएं भूल जाने का मन बना लिया है। लोगों की इतनी चिंता है कि कभी अपनी दवा तक लेना याद नहीं रहता या फिर समय से खाना लेना भी नहीं होता है। स्वाति, आरएचओ(एएनएम) 4 माह की गर्भवती है और उस पर 53 क्वॉरेंटाइन हुए लोगों की जिम्मेदारी है। उसकी कार्यनिष्ठाको देखकर ही तो स्वाति को इस वर्ष 26 जनवरी को जिला स्तरीय सम्मान से भी सम्मानित किया गया था। वार्ड 35, बिरगांव के दुर्ग नगर में पदस्ठ,स्वाति (27)के इस प्रतिबद्धता के पीछे उनके पति और ससुराल वालों का भी योगदान है जो हमेशा उनको प्रेरित करते रहे हैं। इस वक़्त स्वाति पर क्वॉरेंटाइन किये हुए  53 लोगों की जिम्मेदारी है जिसमें 2 विदेश यात्रा और 51 लोग देश के अलग अलग प्रांतों से आये है।

''मुझे मेरे पति का पूरा सहयोग मिलता है। घर के काम में हाथ बटाने के बाद वह मेरे साथ सुबह से ही क्वॉरेंटाइन किये हुए लोगों की जानकारी और सर्वे में मदद करते है। गर्भावस्था के कारण मुझमें भी कुछ बदलाव आये हैं जिनमें व्यवहार परिवर्तन भी शामिल है। लेकिन इस सब पर काबू करके मैं लोगों के स्वास्थ्य पर ध्यान देती हूँ। कुछ लोग बहुत अच्छे हैं तो कुछ का व्य्वहार ऐसा की जैसे हम ही उनके दुश्मन हों,’’ वह बताती है। मास्क और अप्रिन पहनकर डोर टू डोर जाकर हेल्थ सर्वे कर रिकॉर्ड करने का काम स्वाति अपनी टीम के साथ 15 मार्च से कर रही है। बिरगांव के 2 वार्डों की ज़िम्मेदारी उनको मिली है जिसकी जनसंख्या लगभग 7000 है। टीम में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन है जो मिलकर लोगों के स्वास्थ्य के साथ साथ क्वॉरेंटाइन हुए लोगों के आसपास के 50 घरों का सर्वे करते है।  

स्वाति कहती है जब से कोरोना वायरस का खतरा प्रदेश में है लोगों को होम क्वॉरेंटाइन किया गया है जिनकी जानकारी एकत्रित करने में कभी खाना छूट जाता है तो कभी दवा लेनी भूल जाती है। बाहर से आए हुए कुछ लोगों के साथ तो भाषा आड़े आ जाती है जिसके कारण कई बार बात समझ में आती है तो कई बार नहीं भी। ''मैं तो भगवान से यही दुआ करती हूं कि यह सब ठीक हो जाएं और मेरा आने वाला बच्चा भी स्वस्थ हो। चिंता तो रहती है जब लोग कहना नहीं मानते हैं। कभी-कभी तो पुलिस को लेकर भी साथ में चलना पड़ता है।  कुछ नासमझ तो हमारी सेवा भावना को नहीं देखते हैं। उनको लगता है हम जबरदस्ती उनके स्वास्थ्य का ख्याल रख रहे हैं। ऐसे लोगों से कहना चाहूंगी कि स्वास्थ्य विभाग का कोई भी कर्मचारी आपके स्वास्थ्य के लियें उतना ही वफादार है जितनी एक मां अपने बच्चे के प्रति होती है।''

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