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विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष- शिशुवती मां भी है समुदाय की सेवा में, क्वॉरेंटाइन लोगों की जिम्मेदारी 

राहुल चौबे  | 06 Apr , 2020 04:25 PM
विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष- शिशुवती मां भी है समुदाय की सेवा में, क्वॉरेंटाइन लोगों की जिम्मेदारी 

रायपुर। घर पर 7 माह की बच्ची और क्षेत्र के 7 क्वॉरेंटाइन लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी। 28-वर्षीय एएनएम ज्योति निषाद निभा रही हैं दोनों जिम्मेदारियां। शहरी स्वास्थ्य सुविधा केंद्र, बिरगांव, डेरा परा बिरगांव में पदस्थ,ज्योति कहती हैं परिवार और समाज में तालमेल बिठाना और मानव सेवा करना ही एक एएनएम का असली जीवन है। ज्योति के क्षेत्र में 7 लोग क्वॉरेंटाइन किए गए हैं जो मुंबई, गोरखपुर, पटना और अन्य प्रदेशों से आए हैं। इन क्वॉरेंटाइन हुए लोगों का रूटीन चेकअप और आसपास के क्षेत्र में रह रहे 50 घरों के सर्वे कार्य का दायित्व  भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा उसे दिया गया है। ज्योति ने बताया औद्योगिक क्षेत्र में स्थित डेरापारा अपने आप में ही एक अलग पहचान रखता है।क्षेत्र में नशाखोरी और ट्रांसपोर्ट का एरिया होने के कारण यहां पर काम करना एक चुनौती है। यहां लोग अपनी मस्ती में मस्त है। स्वास्थ्य के प्रति उनकी जागरूकता भी बहुत कम है । सऊदी अरब से आए एक व्यक्ति को जब यहाँ क्वॉरेंटाइन किया गया था, वह इस क्षेत्र का पहला क्वॉरेंटाइन का ममला था। लोग बहुत टेंशन में आ गये थे, उनको समझाना भी एक कठिन काम था।  ''जब हम उनसे मिलने गए तो उनका व्यवहार हमारे प्रति बड़ा अजीब सा था। लेकिन मैंने ठान लिया था मैं इस काम को पूरा करुंगी। मैं उनके पास गई लेकिन लोग एकदम से नहीं खुलते हैं। धीरे-धीरे उनसे बातचीत की तो उन्होंने मुझे अपनी यात्रा हिस्ट्री बताई और  हमने उनको  कोरोना वायरस के संक्रमण और महामारी पर विस्तार से बताया। हमने उन्हें समझाया उनका क्वॉरेंटाइन होना क्यों जरूरी है। पहले तो वह थोड़े से विचलित हुए,लेकिन बाद में वह मान गए,’’

ज्योति ने बताया कि यह परिवार सारे नियमों का पालन किया। स्वास्थ्य विभाग ने इस परिवार की नियमित जांच की और प्रतिदिन उनकी आवश्यकताओं को पूरा किया जिसका परिणाम यह हुआ उनका क्वॉरेंटाइन का समय आसानी से पूरा हुआ और क्षेत्र में संक्रमण के फैलने का खतरा भी टल गया। ज्योति कहती है परेशानी तब होती है जब लोग कहना नहीं मानते हैं। कभी-कभी लोगों को समझाने के लिए  काफी मेहनत करनी पड़ती है। उनकी टीम में एक ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक, एक डॉक्टर, एक आंगनवाड़ी सहायिका, एक मितानिन और एक मितानिन ट्रेनर है। क्वॉरेंटाइन में रहने वाले लोगों का नियमित टेंपरेचर लेना होता है और क्वॉरेंटाइन में रखे गए लोगों को हाथ पर सील लगाकर रखा जाता है 'मैं समुदाय से यही कहना चाहूंगी वह अपने परिवार के साथ-साथ सबके परिवार का ध्यान रखें।अगर आपको लगता है आप अस्वस्थ हैं तो नजदीकी शासकीय चिकित्सालय में संपर्क करें। स्वास्थ्य कार्यकर्ता मितानिन से भी संपर्क करें ताकि कोरोना वायरस जैसी संक्रमित बीमारी को बढ़ने से रोका जा सके। मेरा परिवार भी खुश रहे और आपका परिवार भी खुश रहे।'

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