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राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस पर विशेष : मनोचिकित्सा अद्भुत विषय, एक पहेली लगता है :डॉ. अविनाश शुक्ला

राहुल चौबे  | 30 Jun , 2020 07:01 PM
राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस पर विशेष : मनोचिकित्सा अद्भुत विषय, एक पहेली लगता है :डॉ. अविनाश शुक्ला

रायपुर। सब लोग सपना देखते है लेकिन सपना उनका ही पूरा होता है जो संघर्ष करना जानते हैं। डॉ.अविनाश शुक्ला का भी सपना बचपन से बडे होकर डॉक्टर बनने का था। उनकी रुचि जीव विज्ञान में गणित से ज्यादा थी। लेकिन छोटे शहर से होने की वजह से सही मार्गदर्शन मिलना काफी मुश्किल रहा। उस समय सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में सीट कम होने के वजह से प्रतिस्पर्धा और भी मुश्किल होती थी।इस वजह से 12वीं. के बाद एक साल का ब्रेक लेकर प्रवेश परीक्षा की तैयारी की। लक्ष्य तय था कि डॉक्टर ही बनना है। साथ में तैयारी कर रहे साथियों और सीनियर छात्रों के अनुभव डॉ. अविनाश समझ गए कि कोचिंग से ज़्यादा फायदा खुद पढाई करके ही होगा। उन्होंने ज्यादा समय खुद से पढाई पर ही दिया। साथ ही परिवार और दोस्तों का प्रोत्साहन हमेशा बना रहा ।सफलता मिलने के बाद आगे की एमबीबीएस बैंगलोर मेडिकल कॉलेज से किया,जो भारत के 10 सर्वश्रेष्ठ महाविद्यालयों में गिना जाता है।घर से दूर रहना एक अलग ही चुनौती रही लेकिन साथ में एक नई भाषा भी सीखने का अवसर मिला।

परिवार और दोस्तों का साथ निरंतर बना रहा। अंतिम वर्ष तक अलग-अलग विषय का अध्ययन करके यह भी समझ आया कि उनका झुकाव मनोचिकित्सा की ओर ज्यादा है।यह एक अद्भुत विषय लगता था। कैसे लोगों को मनोरोग होते है, और कैसे लोग फिर सामान्य जीवन जी लेते है। एक आश्चर्यचकित करने वाली पहेली जैसा था। पोस्ट ग्रेजुशन प्रवेश परीक्षा के लिए फिर एक साल गैप लेना पड़ा। यह पहले किसी भी परीक्षा से ज्यादा मुश्किल लगी लेकिन प्रयास के बाद सफलता भी मिली। और मनोचिकित्सा की पढाई पहले केंद्रीय मानसिक चिकित्सा संस्थान, रांची और उसके बाद विम्हांस दिल्ली से की ।डॉ.अविनाश शुक्ला वर्तमान में रायपुर जिला अस्पताल, पंडरी में मनोचिकित्सक के रूप में कार्यरत है। पिछले कुछ समय कोविड-19 सभी के लिए चुनौती पूर्ण रहा है। कोरोना हम सभी के लिए एक अज्ञात बीमारी है और हम अभी भी इसे पूरी तरह समझ नहीं पायें हैं। लोगों में इस दौरान भीषण तनाव, चिंता,अकेलापन और अवसाद देखने को मिल रहा है। इस दौरान सभी से सामाजिक संपर्क कम हो जाने की वजह से तथा बचाव के लिए नियमित रूप से शारीरिक दूरी बनाये रखना भी एक मुश्किल काम है जिसके हम आदी नहीं है।डॉ.शुक्ला लॉक डाउन के समय खुद की देखभाल के साथ अस्पताल आये हुए मरीजों से मिलना, उनको आश्वस्त करना और उनकी काउन्सलिंग करना सुनिश्चित किया गया ।

साथ ही स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार क्वारंटाइन केंद्रों का नोडल अफसर बनाया गया जहाँ जाकर श्रमिकों तथा वहॉ के लोगों की मानसिक स्वास्थ्य की जांच भी इस दौरान होती रही। स्पर्श क्लिनिक में कम कर्मचारी होने के बावजूद भी निरंतर कार्य होता रहा है ।यह हम सभी की कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण है । जब भी मुश्किल आई कभी भी अपने साथियों से उस बारे में बात करने, समस्या का समाधान खोजने के लिए मदद मांगने में संकोच नहीं किया ।किसी भी कार्य में सफलता के लिए सही मार्गदर्शन मिलना अति आवश्यक है। मुझे गर्व है कि अब तक जीवन के सभी कड़ी में मुझे निरंतर ऐसे लोगों और मित्रों का साथ मिलता रहा है और मेरे साथ मेरा परिवार प्रेरणा स्तंभ बन कर हमेशा साथ रहा है । डॉ शुक्ला ने कहा कि राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस पर मैं उन सब डॉक्टर्स का आभार प्रकट करता हूँ, जिन्होंने ने मेरा मार्गदर्शन कर इस काबिल बनाया और अपने सभी मित्रों का जिनका मेरी सफलता में बराबर का योगदान दिया है।

 

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