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अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस पर विशेष : मनोरोगी स्ट्रेचर पर आया और अपने पैर पर चल कर गया : वैभव लाल

राहुल चौबे  | 11 May , 2020 03:20 PM
अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस पर विशेष : मनोरोगी स्ट्रेचर पर आया और अपने पैर पर चल कर गया : वैभव लाल

रायपुर/बिलासपुर। राज्य के मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय, सेन्द्री में पदस्थ प्रदेश के पहले पुरुष साइकाइट्रिक नर्स वैभव लाल मनोरोगियों के लिए एक दोस्त, बड़े भाई, पिता और एक मां का रोल अदा करते हैं। मनोरोगी को जब अस्पताल लाया जाता है उसकी स्थिति बहुत ही दयनीय होती है। वैभव ने बताया ​कि जब मनोरोगी को अस्पताल लाया जाता है। तब उनके बाल बड़े—बड़े होते हैं और अक्सर उनके शरीर से बदबू आती है। आम आदमी तो शायद उसके पास खड़े होकर बात भी करना गवारा न करें लेकिन हम उसकी देखभाल भाई और दोस्त की तरह करते हैं। उसके बाल कटवाते हैं, उसको नहलाते हैं और फिर उसका रिकॉर्ड बनाया जाता है जिससे नियमित मेंटेन किया जाता है। 2015 से अब तक लगभग 2600 मनोरोगी अस्पताल से ठीक होकर गए हैं और नियमित अपनी दवाई ले रहे। वैभव बताते हैं संजय (बदला हुआ नाम) मनोरोगी—जो कुछ साल पहले अस्पताल आया था--को ठीक करना उनके लिए एक चुनौती था।

गाली देना और शरीर को टेढ़ा कर लेना या फिर अजीब सी मुद्राएं बनाना उसकी आदत जैसी थी।  लेकिन 6 से 8 माह के नियमित इलाज और काउंसलिंग से उसकी ठीक किया गया। स्ट्रेचर पर आया था और अपने पैर से चलकर वापस गया। निश्चित रूप से यह बहुत बड़ी घटना थी। हमारी टीम ने मिलकर एक चैलेंज के रूप में उसको स्वीकार किया और उसको ठीक किया। आज कल भी एक चुनौती भरा रोगी दीपक (बदला हुआ नाम) है जो कैनाबिस का आदि है। उसको लगता वह बहुत महान है। वह 5 वर्ष से नियमित उपचार के लिए आता है और कभी-कभी उसको एडमिट भी करना पड़ता है। उसको नशे के नुकसान और फायदे के बारे में भी बताया गया। वह सब जानता है लेकिन फिर भी आत्मशक्ति नहीं बना पाता है। नशे की प्रवृत्ति उसको प्रतिदिन उसके सुखी जीवन को छीन रही है हमने भी प्रण किया हुआ है कि हम उसको जल्द ही ठीक करेंगे।

वैभव लाल बताते हैं जब वह बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष के छात्र थे उस समय उनकी इंटर्नशिप माना स्थित अस्पताल में मनोरोगियों के बीच हुई थी जब उन्हें अहसास हुआ शारीरिक चोट को तो इलाज से ठीक किया जा सकता है लेकिन दिल या मन पर लगी चोट को ठीक करना बड़ा चैलेंज है।उसी दिन उन्होंने तय कर लिया था वह मनोरोगियों के लिए ही काम करेंगे। पढ़ाई पूरी करने के बाद एक प्राइवेट नर्सिंग महाविद्यालय में वाइस प्रिंसिपल के रूप में ज्वाइन भी किया जहाँ छात्राओं को नर्सिंग के बहुत सारे गुण भी सिखाएं लेकिन मन में मनोरोगियों के प्रति बने नजरिए को नहीं बदल सके। सन 2013 में सेन्द्री में जब राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय बनाया गया तब उनके सपने को पूरा करने का मौका उन्हें मिला। वैभव कहते हैं जब से कोविड-19 का संक्रमण देश में बढ़ा है तब से अस्पताल प्रशासन ने भी सख्त और कठोर कदम उठाए हैं।

नए आने वाले हर रोगी को 15 दिन आइसोलेशन में रखते हैं और उसकी कोविड-19 जांच से पूर्व प्रबंधन के जारी सारे प्री-कॉशन लेते हैं। अनुभव को साझा करना जरूरी है और अपने अनुभव को लोगों के बीच देने से कार्य में सुदृढ़ता आती है। कार्य अच्छा होता है। लॉक डाउन के दौरान जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर कोरबा, अंबिकापुर और धमतरी के विद्यार्थियों को फ्री क्लास भी ऐप के माध्यम से वैभव आजकल ले रहे हैं ताकि घर बैठे एजुकेशन को उनके द्वार तक पहुंचाया जाए और उनको एक अच्छा और जिम्मेदार नर्स बनाने में मदद मिल सके।

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