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अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों पर दर्ज केस की हुई समीक्षा, 8 जिलों के 528 प्रकरणों पर हुआ विचार

रविशंकर शर्मा  | 02 Oct , 2020 10:22 AM
अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों पर दर्ज केस की हुई समीक्षा, 8 जिलों के 528 प्रकरणों पर हुआ विचार

रायपुर। उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति एके पटनायक (से.नि.) की अध्यक्षता में बीते कल वीडियो कांफ्रेंसिंग से अनुसूचित जनजाति वर्ग के रहवासियों के खिलाफ दर्ज प्रकरणों की समीक्षा की गई। इनमें बस्तर संभाग के जिले क्रमशः बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, सुकमा, बीजापुर, कोंडागांव और राजनांदगांव शामिल हैं। बैठक में 528 प्रकरणों पर विचार किया गया। इसमें से 216 प्रकरण अभियोजन से वापस लिए जाने की अनुशंसा समिति की ओर से की गई। इसी प्रकार 169 प्रकरण धारा 265 ए दंड प्रक्रिया सहिता के तहत अभिवाक् सौदेबाजी (प्ली ऑफ बारगेनिंग) के माध्यम से न्यायालय से निराकरण के लिए अनुशंसा की गई। बैठक में समिति के सदस्य एवं महाधिवक्ता छत्तीसगढ़ शासन सतीशचन्द्र वर्मा, अपर मुख्य सचिव गृह सुब्रत साहू, पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी, सचिव गृह विभाग एडी गौतम, महानिदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं संजय पिल्लै, संचालक लोक अभियोजन प्रदीप गुप्ता, पुलिस महानिदेशक रेंज बस्तर सुंदरराज पी, उप पुलिस महानिरीक्षक सीआईडी एससी द्विवेदी, उप पुलिस महानिरीक्षक कांकेर डॉ. संजीव शुक्ला उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि पूर्व में अक्टूबर 2019 और मार्च 2020 में समिति की ओर से उक्त आठों जिलों के अनुसूचित जनजाति वर्ग के रहवासियों के विरुद्ध दर्ज कुल 404 प्रकरणों को अभियोजन से वापस लिए जाने और 81 प्रकरण धारा 265 ए दंड प्रक्रिया संहिता के तहत अभिवाक् सौदेबाजी (प्ली ऑफ बारगेनिंग) के माध्यम से न्यायालय से निराकरण के लिए अनुशंसा की गई थी। इस प्रकार अब तक अनुसूचित जनजाति वर्ग के रहवासियों के विरूद्ध दर्ज कुल 620 प्रकरणों को अभियोजन से वापस लिए जाने और 250 प्रकरण धारा 265 ए दंड प्रक्रिया संहिता के तहत अभिवाक् सौदेबाजी (प्ली ऑफ बारगेनिंग) के माध्यम से न्यायालय से निराकरण के लिए अनुशंसा की जा चुकी है।

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