GLIBS

पॉवर कंपनी ने अवैध शराब परिवहन करते जब्त वाहनों के प्रकरण में की कठोर कार्रवाई

रविशंकर शर्मा  | 17 Jan , 2020 08:23 PM
पॉवर कंपनी ने अवैध शराब परिवहन करते जब्त वाहनों के प्रकरण में की कठोर कार्रवाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पाॅवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी बलौदा बाजार के परियोजना उप संभाग कार्यालय में किराए पर लगी गाड़ियों से दो दिन पहले अवैध रूप से मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ शराब लाने के प्रकरण पर शुक्रवार को कठोर कार्रवाई की गई। इन गाड़ियों का अनुबंध निरस्त करते हुए सुरक्षा निधि को राजसात किया गया। साथ ही वाहन मालिक को ब्लैक लिस्टेड करने की अनुशंसा की गई। पाॅवर कंपनी अध्यक्ष शैलेन्द्र शुक्ला ने इस प्रकरण पर उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे। जांच के बाद पाया गया कि कबीरधाम के पंडरिया कुकदूर थाना अन्तर्गत शराब का अवैध परिवहन करने के लिए जब्त वाहन टाटा पिकअप क्रमांक सीजी 22 एच-4367 और टीयूव्ही महेन्द्रा सीजी 22 जी-7457 छत्तीसगढ़ स्टेट पाॅवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के नहीं है। इनका प्रोपराईटर अनिल गुप्ता है जो कि बलौदा बाजार क्षेत्र के विद्युत विषयक कार्यों के लिए इन वाहनों को किराए पर लगाया गया था। इन गाड़ियों के संबंध में बलौदा बाजार विद्युत संभाग के अधीक्षण अभियंता सलिल खरे ने बताया कि वाहन मालिक मेसर्स माॅ शारदा ट्रांसपोर्ट प्रोपराईटर अनिल गुप्ता की ओर से इन गाड़ियों को वेल्यूवेशन और मरम्मत कार्य के लिए 14 जनवरी को विद्युत कार्यालय से ले लिया गया था। अगले दिन 15 जनवरी को दोनों गाड़ियों में अवैध शराब परिवहन करते हुए कुकदूर पुलिस ने पकड़ा। तब ये गाड़ियाॅ पाॅवर कंपनी के किसी भी कार्य के लिए उपयोग में नहीं ली जा रही थी। इन वाहनों में छत्तीसगढ़ स्टेट पाॅवर कंपनी के स्टीकर लगे हुए थे, जिससे यह भ्रम की स्थिति निर्मित हुई है कि बिजली विभाग की गाड़ियों में शराब की तस्करी की जा रही है। उक्त प्रकरण की जांच उपरांत यह भी पाया गया कि पाॅवर कंपनी में किराये पर लिए गए वाहनों में चालक और कंडक्टर भी वाहन प्रोपराईटर के ही लगाये गये थे। अतः इन वाहनों में पाॅवर कंपनी का कोई कर्मचारी संलिप्त नहीं था। थाना प्रभारी कुकदूर की ओर से जारी किए गए प्रेस विज्ञप्ति में भी इस बात की स्पष्ट जानकारी दी गई है कि शराब तस्करी में लगे वाहन और कर्मचारियों का पाॅवर कंपनी से कोई वास्ता नहीं है।

Author/Journalist owns and is responsible for views/news published and the publisher/printer is in no way liable for such content.