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बूढ़ातालाब के जलकुंभी से लोग परेशान, नगर पंचायत मेहरबान ?

बूढ़ातालाब के जलकुंभी से लोग परेशान, नगर पंचायत मेहरबान ?

बलौदाबाजार। जिला मुख्यालय बलौदाबाजार से करीब 17-18 किलोमीटर की दूरी पर बसा नगर पंचायत लवन है, जो कि प्राचीन काल से ही सैकड़ों तालाबों के लिए मशहूर रहा है। लेकिन इन दिनों तालाबों के मामले में ख्याति से कोसों दूर नजर आ रही है। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार यहां कुल तालाबों की संख्या 108 माने जाते हैं और उन 108 तालाबों में यहां का सबसे बड़ा तालाब बूढ़ातालाब को माने गए हैं, जो करीब 100 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। वर्तमान में बूढ़ातालाब जलमग्न होने के बजाय जलकुंभी से आच्छादित हो गया है। पानी नहीं के बराबर है फिर भी आसपास के लोग इसी तालाब से ही निस्तारित करने को मजबूर हैं। जलकुंभी का फैलाव इस कदर हावी है कि यदि समय रहते जलकुंभी को तालाब से नहीं हटाया गया तो पूरे तालाब में पानी का एक बूंद नहीं रहेगा। तालाब में केवल जलकुंभी ही दिखाई देगी। जलकुंभी के चलते इन दिनों तालाब मैदान के रूप में तब्दील होता दिख रहा है अगर स्थिति ऐसी रहा तो तालाब धीरे धीरे मैदान में बदल जाएगी और रहवासियों के लिए भविष्य में निस्तारी की विकराल समस्या निर्मित होगी, जिससे इंकार नहीं किया जा सकता।

गौरतलब हो कि जलकुंभी एक ऐसा जलीय पौधा है, जो जल में रहकर कई तरह के बीमारियों का कारक बनने वाले पौधें की श्रेणी में आते हैं फलस्वरूप जलकुंभी के भराव के चलते तालाब के पानी से नहाने वाले वार्डवासियों को खुजली, फुंसी, फोड़ा एवं अनेक बीमारियों का भय सता रहा है। वार्डवासियों का कहना है कि नगर पंचायत के अधिकारियों को इस दिशा में सकारात्मक पहल करना चाहिए। ताकि तालाब के अस्तित्व को बचाया जा सके। लेकिन एक विडंबना यह भी है कि नगर पंचायत लवन का सुस्त एवं गैरजिम्मेदारी रवैये से लोगों को विभिन्न परेशानियों से संघर्ष करना पड़ रहा है। कुछ दिनों पहले नगरवासियों ने इस गंभीर समस्या को लेकर नगर पंचायत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ मुहिम भी चलाए थे और कार्यालय में पूरे नगर वासियों ने ताला भी जड़ कर तथा लवन खरतोरा रायपुर मुख्य मार्ग पर कई घंटों तक  चक्का जाम कर पुरजोर विरोध प्रदर्शन कर शासन प्रशासन एवं नगर पंचायत लवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को हरकत में लाने का प्रयास किए थे। नगरवासियों की प्रदर्शन की खबर जिला मुख्यालय तक पहुंचे थे। जिला मुख्यालय तक पहुंचते ही शासन प्रशासन हरकत में आया और अधिकारियों ने नगरवासियों को आश्वासन देकर तालाब की साफ सफाई पर ध्यान देने की बात किए। कुछ दिनों बाद उक्त तालाब की महज खाना पूर्ति साफ सफाई करते हुए नगर पंचायत लवन के अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी कर्तव्यों से पल्ला झाड़ कर तालाब को  बदहाल स्थिति में छोड़ कर सफ़ाई अभियान रोक दिए गए थे। उक्त तालाब का पानी इतना गन्दा हो चुका है,जो नाली का पानी जैसा प्रतीत हो रहा है लोग नहाने को मजबूर है और नहाने से फोला फुंसी, चर्म रोग आदि बीमारी उत्पन्न हो रहा है।

साइहा तालाब की स्थिति बदतर

एक और अन्य तालाब साइहा है, जिसकी स्थिति बद से बदतर है। साइहा तालाब नगर पंचायत लवन के भालुकोना-तुरमा मुख्य मार्ग पर स्थित तालाब जो कि मड़ी कंचन केंद्र के आने से पूरा तालाब गन्दा हो गया है। मड़ी कंचन केन्द्र के जो खराब कचरा रहता है उसे बाहर फेंक दिया जाता है, जिससे पानी स्त्राव होकर तालाब पर जा रहा है,जिससे तालाब की गंदगी दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। तालाबों की साफ सफाई के लिए आंदोलन के बाद प्रशासन स्तर पर टेण्डर  हुआ परन्तु टेंडर कमीशन और भ्रष्टाचार से अछूते नहीं रहा। ख़ास बात यह भी है कि मशहूर बूढ़ातालाब के लिए भी कुछ माह पूर्व टेण्डर हुआ था यह भी कमीशन और भ्रष्टाचार की दाग से नहीं बच पाए। इससे न कुछ काम हुआ और नहीं तालाब की स्थिति बदली बल्कि ऐसी नौबत आया कि प्रशासन को जारी टेण्डर को रद्द करना पड़ा। नगर पंचायत लवन में रहने वाले मनेन्द्र जायसवाल का कहना है कि  यह एक भीषण समस्या है।परन्तु इस समस्या का आज तक किसी ने भी  कोई हल नही निकाला है हम सभी वार्डवासी इस मटमैले पानी से  नहाने पर मजबूर है आखिर जाए तो जाए कहा। इसी तरह एक अन्य वार्ड वासी हेमकरन जायसवाल ने बताया कि शासन प्रशासन से कई बार गुहार लगाये।

वहीं इस मामले को लेकर ग्लिब्स संवाददाता ने नगर पंचायत के मुख्य नगर पंचायत अधिकारी मनीराम जायसवाल से तालाबों में निर्मित समस्याओं को लेकर चर्चा की। इस पर मनीराम ने बताया कि उक्त तालाबों में निर्मित समस्याओं के निदान के लिए टेंडर प्रक्रिया का प्रस्ताव प्रशासन के पास अग्रेषित किये जा चुके हैं। स्वीकृति मिलने के बाद तालाबों की साफ सफाई की काम प्रारम्भ होंगे। आगे चर्चा में कहा कि जलकुंभी पर मेहरबान वाली कोई बात नहीं है। वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष लवन डेरहा राम डहरिया ने बताया कि शासन ने पहले टेंडर को निरस्त कर दिए थे लेकिन अब इस पर बहाल करते हुए पुनः टेण्डर प्रक्रिया के समिति बन गई है। प्रशासन से स्वीकृति के लिए भेज चुके हैं स्वीकृति मिलने के बाद तालाबों की साफ सफाई पर ध्यान दिए जाएंगे। मड़ी कंचन केंद्र के कचरे को तालाबों में प्रवाहित यदि कोई कर रहा है तो अनुचित है। इस पर अविलंब संज्ञान लिए जाएंगे की बात कहा।

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