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पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती

राहुल चौबे  | 16 Jan , 2020 12:41 PM
पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती

बिलासपुर। प्रदेश में छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 में दी गई व्यवस्था को संविधान के खिलाफ बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की डिविजन बेंच में सुनवाई की गई है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद डिविजन बेंच ने केंद्र और राज्य सरकार के अलावा राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए है। इसके लिए 4 सप्ताह का समय दिया है। याचिकाकर्ता भुनेश्वर नाथ मिश्रा ने वकील रोहित शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर किया और कहा है कि प्रदेश में पंचायती राज अधिनियम 1993 में जो व्यवस्था दी गई है। वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के साथ ही संविधान में दी गई व्यवस्थाओं के खिलाफ है।

याचिकाकर्ता ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव जिसमें ग्राम पंचायत जनपद पंचायत के बाद जिला पंचायत के लिए हो रहे चुनाव में राज्य सरकार ने आरक्षण की जो प्रक्रिया अपनाई है वह संविधान में दी गई व्यवस्था के विपरीत हैं। याचिका के अनुसार ग्राम पंचायत के सरपंच से लेकर पंचवा जनपद व जिला पंचायत के सदस्यों के लिए किए गए। आरक्षण में सुप्रीम कोर्ट की ओर से पूर्व में निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं किया है। राज्य शासन ने आरक्षण की जो प्रक्रिया अपनाई है । वह 50 फ़ीसदी से अधिक है याचिकाकर्ता ने पंचायती राज अधिनियम की धारा 13(4)(2) धारा 17,23,25,32 एवं 129(ई) को निरस्त करने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने नहीं राजनीति में आरक्षण की सीमा 50 दिन के भीतर रखने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने पिछड़े वर्ग के नागरिकों में से अल्पसंख्यक, एसिड अटैक सरवाइवर महिला थर्ड जेंडर एंग्लो इंडियन आदि को राजनीतिक रूप से पिछड़ा मानते हुए चुनाव में आरक्षण का लाभ देने की गुहार लगाई है।

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