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श्राद्ध या पितर पक्ष के अंतिम दिन होती है सर्व पितृ अमावस्या, पितर लौट जाते हैं तृप्त होकर

यामिनी दुबे  | 17 Sep , 2020 01:10 PM
श्राद्ध या पितर पक्ष के अंतिम दिन होती है सर्व पितृ अमावस्या, पितर लौट जाते हैं तृप्त होकर

रायपुर। श्राद्ध का अंतिम दिन होता है सर्व पितृ अमावस्या। पितृ पक्ष की शुरुआत होते ही हमारे पितर धरती पर आते हैं और सर्व पितृ को वह अपने लोगों से विदा लेकर वापस चले जाते हैं। इसलिए यह पितरों की विदाई का दिन माना जाता है। इस दिन का श्राद्ध कर्म करना फलदायक माना गया है। अमावस्या को श्राद्ध करने के पीछे मान्यता है कि इस दिन पितरों के नाम की धूप देने से मानसिक व शारीरिक तौर पर तो संतुष्टि या शांति प्राप्त होती ही है, साथ ही घर में भी सुख-समृद्धि आती है। सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। मान्यता यह भी है कि इस अमावस्या को पितृ अपने प्रियजनों के द्वार पर श्राद्धादि की इच्छा लेकर आते हैं। यदि उन्हें पिंडदान न मिले तो वह असंतुष्ट ही वापस चले जाते हैं, जिसके फलस्वरूप घरेलू कलह बढ़ जाता है व सुख-समृद्धि में कमी आने लगती है। ऐसी अवस्थआ में कार्य भी बिगड़ने लगते हैं। इसलिए श्राद्ध कर्म अवश्य करना चाहिए।

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