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नगर निगम से जयंती समारोह में शामिल नहीं होने पर मृत्युंजय दुबे ने जताई नाराजगी, इन्होंने दिया धरना

रविशंकर शर्मा  | 09 Oct , 2019 10:45 PM
नगर निगम से जयंती समारोह में शामिल नहीं होने पर मृत्युंजय दुबे ने जताई नाराजगी, इन्होंने दिया धरना

रायपुर। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, अधिवक्ता कमल नारायण शर्मा का आज 9 अक्टूबर को जयंती समारोह शहीद स्मारक भवन में नगर पालिक निगम प्रशासन की ओर से रखा गया था। इसकी सूचना किसी भी पार्षद को नहीं दी गई थी । समारोह की सूचना महापौर और सभापति को लिखित तौर पर भेजी गई थी। ये कहना है मृत्युंजय दुबे का। दुबे ने कहा कि सुबह 10 बजे जब सभापति शहीद स्मारक भवन पहुंचे तो पूरा परिसर धूल से पटा पड़ा था। सभापति ने इसकी जानकारी नगर निगम के अधिकारियों व संस्कृति विभाग को दी और मृत्युंजय दुबे को भी फोन कर सारी स्थिति से अवगत कराया। मृत्युंजय दुबे का कहना है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के अपमान और जयंती समारोह का आदेश निकालकर सत्ता पक्ष द्वारा इस तारीख को भूलना यह एक बहुत बड़ी प्रशासनिक गलती है । सभापति प्रफुल्ल विश्वकर्मा के नेतृत्व में पार्षदों ने कमल नारायण शर्मा के प्रतिमा स्थल पर धरना दिया। इससे भविष्य में नगर निगम और राज्य सरकार किसी भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का किसी भी रूप में पुन: अपमान न करें। इस दौरान भी सत्ता पक्ष से कोई भी जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा तो सभी उपस्थित लोगों ने माल्यार्पण कर नमन किया। दुबे ने कहा कि 10 दिन पहले ही  28 सितम्बर को शहीदे आजम भगतसिंह की जयंती को भी नगर निगम प्रशासन भूल कर पहले ही बड़ी गलती कर चुका था अब दुबारा यही हुआ।

गांधी विचार यात्रा निकाली जा रही है, महात्मा गांधी के विचारों को जनजन तक पहुंचाने का उद्देश्य है, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सभी अवसरों में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के योगदान का स्मरण कर उनके परिजनों के सम्मान की बातें करते हैं और मिलते भी हैं । दूसरी ओर नगर निगम में काबिज कांग्रेस की सत्ता में बैठे उनके नेतागण स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान, महत्ता की उपेक्षा करने में लगे हैं। दुबे ने निगम के जिमेदारों के इस रवैये की निन्दा करते हुए कहा कि मैं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आचार्य नरेन्द्र दुबे का पुत्र हूं, इसलिए मुझे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की उपेक्षा अन्दर तक उद्वेलित करती है। केवल गांधी विचार पदयात्रा से कुछ होना नहीं है। सार्वजनिक पदों में बैठे जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और उनके परिजनों का सभी अवसरों पर सम्मान करना ही होगा।

 

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