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राजनांदगांव की तर्ज पर महासमुंद में बनेगा मेडिकल काॅलेज

राजनांदगांव की तर्ज पर महासमुंद में बनेगा मेडिकल काॅलेज

महासमुंद। राजनांदगांव की तर्ज पर महासमुंद में मेडिकल काॅलेज का निर्माण किया जाएगा।जिला हाॅस्पिटल के पास ग्राम खरोरा में मेडिकल काॅलेज के लिए जगह चिन्हित किया गया है। विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर का प्रयास रंग लाया है। अलबत्ता जिला प्रशासन ने मेडिकल काॅलेज के लिए ड्राइंग व प्राक्कलन तैयार किया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों रायुपर से पहुंचे अफसरों एडिशनल डायरेक्टर डॉ.निर्मल वर्मा, रजिस्टार डॉ.जितेंद्र तिवारी व अस्सिटेंट डायरेक्टर डॉ.प्रतीक प्रधान ने विधायक विनोद चंद्राकर की मौजूदगी में ग्राम खरोरा में स्थल निरीक्षण करने के साथ ही जिला चिकित्सालय में उपलब्ध संसाधनों का जायजा लिया था। टीम ने ग्राम खरोरा में मेडिकल कॉलेज के लिए स्थल का निरीक्षण किया। बाद इसके जीएनएम व जिला हॉस्पिटल का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के बाद विधायक चंद्राकर ने डीएमई डाॅ.एसएल आदिले से चर्चा कर मेडिकल काॅलेज खोले जाने की प्रक्रिया में तेजी लाने चर्चा की। इस पर 12 दिसंबर 2019 को चिकित्सा शिक्षा के संचालक ने प्रमुख अभियंता को पत्र लिखकर काॅलेज के लिए ड्राइंग व प्राक्कलन उपलब्ध कराने कहा है। पत्र में बताया गया है कि केंद्रीय प्रवर्तित योजना के अंतर्गत महासमुंद में मेडिकल काॅलेज स्थापित किया जाना है। इसके लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है। मुख्यमंत्री की सहमति के बाद छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 22 नवंबर 2019 को प्रस्ताव बनाकर भारत सरकार को भेजा जा चुका है। भारत सरकार की तकनीकी समिति द्वारा इस प्रस्ताव का परीक्षण किया जाना है, जिसके लिए मेडिकल काॅलेज की ड्राइंग व प्राक्कलन लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार किया जाना आवश्यक है। मेडिकल काॅलेज राजनांदगांव की तर्ज पर ही मेडिकल काॅलेज का निर्माण किया जाना है। लिहाजा ड्राइंग व प्राक्कलन उपलब्ध कराई जाए। इधर लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता के पत्र मिलने के बाद कार्यपालन अभियंता महासमुंद सिन्हा ने मेडिकल काॅलेज के लिए ड्राइंग व प्राक्कलन तैयार किया है। वहीं कलेक्टर सुनील जैन ने बताया कि महासमुंद में मेडिकल काॅलेज खोलने की कवायद शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि ग्राम खरोरा के पास काॅलेज के लिए स्थल चयन किया गया है। यहां यह बताना लाजिमी होगा कि नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए शासन से अनुमति के बाद डीएमई कार्यालय से एमसीआई की गवर्निंग बॉडी को प्रस्ताव भेजा जाता है। इसके बाद विवि से एनओसी लेनी पड़ती है। कॉलेज, हॉस्पिटल व हॉस्टल बिल्डिंग तय हो जाने के बाद एमसीआई की टीम निरीक्षण के लिए आती है। कमियों को दूर करने के बाद कॉलेज की मान्यता संबंधी आदेश आता है। विधायक चंद्राकर ने कहा कि मेडिकल काॅलेज खुलने से न केवल चिकित्सा सुविधा का विस्तार होगा बल्कि विभिन्न रोगों के विशेषज्ञों की सेवाएं यहां पर सुलभ हो सकेंगी। उन्होंने बताया कि मेडिकल काॅलेज के लिए वे लगातार शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराते आ रहे हैं। लिहाजा अब इसकी कवायद शुरू हो गई है और इसके लिए ड्राइंग-प्राक्कलन भी तैयार हो गया है।

 

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