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कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने कई विभाग एक साथ,आपसी समन्वय के लिए की चर्चा

रविशंकर शर्मा  | 21 Oct , 2020 09:21 PM
कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने कई विभाग एक साथ,आपसी समन्वय के लिए की चर्चा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास से कुपोषण मुक्ति के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इन प्रयासों और अधिक प्रभावी बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव प्रसन्ना आर. की अध्यक्षता में 21 अक्टूबर को विभिन्न सहयोगी विभागों के मध्य प्रभावी अभिसरण स्थापित कर कुपोषण के स्तर में कमी लाने ऑनलाइन बैठक हुई। बैठक में स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, खाद्य, कृषि एवं उद्यानिकी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण,समाज कल्याण, नगरीय प्रशासन विभाग के नोडल अधिकारियों सहित यूनिसेफ और स्वयं सेवी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों के बीच छत्तीसगढ़ को कुपोषण एवं एनीमिया मुक्त बनाने के लिए समन्वित प्रयासों, अपसी-तालमेल और सहयोग से लक्ष्य प्राप्ति पर चर्चा की गई।सचिव प्रसन्ना ने कहा कि कुपोषण, एनीमिया और जन्म के समय वजन के स्तर में निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार कमी लाने के लिए प्रदेश में पोषण अभियान का संचालन किया जा रहा है।

पोषण अभियान के अंतर्गत अभिसरण एक मुख्य घटक है। सभी विभागों के साथ मिलकर काम करने से कुपोषण की दर में अपेक्षानुसार लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए सभी विभागों के मध्य डाटा और सूचनाओं के आदान प्रदान,संसाधनों का प्रभावी उपयोग और योजनाओं के समन्वित प्रयास की जरूरत है। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों से योजनाओं के साथ क्रियान्वयन और समन्वय पर चर्चा की। उन्होंने प्रदेश के 10 आकांक्षी जिलों पर विशेष ध्यान दिए जाने के लिए कहा। उन्होंने पोषण और स्वास्थ्य की प्रगति आधारित मासिक स्वास्थांक भी तैयार करने के निर्देश दिए जिससे कलेक्टर अपने जिले की मासिक समीक्षा कर सकें।सचिव प्रसन्ना ने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों, प्रचायत प्रतिनिधियों के लिए पोषण और स्वास्थ्य के मुद्दों पर ओरिएंटेशन प्रोग्राम करने और ग्राम सभाओं में पोषण संबंधी जानकारी देने और बुकलेट के माध्यम से जानकारी पहुंचाना तय किया जाना चाहिए। कुपोषण मुक्त पंचायत बनाने के लिए हमें उन्हें मोटिवेट करना पड़ेगा। उन्होंने मनरेगा से जुड़ी महिलाओं को उचित खान-पान की जानकारी देने कहा, जिससे पोषण संबंधी स्थायी व्यवहार परिवर्तन लाया जा सके। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सभी आंगनबाड़ियों में पेयजल और शौचालय के लिए कार्यवाही करने के लिए कहा गया।

उन्हें शहरी इलाकों की बस्तियों और रेल्वे ट्रैक के आसपास की जगहों में अधिक फोकस करने कहा गया जिससे डिसेन्ट्री और डायरिया जैसी बीमारियों के होने का अधिक खतरा रहता है। उद्यानिकी विभाग को सभी आंगनवाड़ियों में शत प्रतिशत पोषण वाटिका निर्माण के लक्ष्य को पूरा करने को कहा गया।खाद्य विभाग के नोडल अधिकारी ने कहा कि कोंडागांव जिले से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में फोटीफाइड चावल वितरण की योजना शुरू की जानी है। इसे जिले के आंगनबाड़ियों में भी दिया जाएगा। सचिव प्रसन्ना ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से महिलाओं और बच्चों को दिए जाने वाले पोषक आहार की पौष्टिकता में वृद्धि करने रागी,कोदो,कुटकी जैसे मिलेट्स मिलाने का भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने कृषि विभाग को मिलेट्स उपलब्ध कराने कहा है।बैठक में पोषण अभियान के नोडल अधिकारी नंदलाल चौधरी ने कहा कि कन्वर्जेंस के आधार पर 31 दिसंबर और उसके बाद 31 मार्च तक लक्ष्यों को निर्धारित कर कार्ययोजना बनाई जाएगी। योजनाओं के उचित क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम का साथ घर-घर विजिट और मॉनिटरिंग पर फोकस किया जाएगा। विभागों के मध्य डाटा के आदान-प्रदान से कमियों को दूर करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए नियमित समीक्षा बैठक पर बल दिया जाएगा। इस दौरान यूनिसेफ और स्वयं सेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी प्रभावी अभिसरण के लिए अपने विचार रखे।

 

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