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मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान जारी : टीएस सिंहदेव

राहुल चौबे  | 22 Jan , 2020 09:02 PM
मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान जारी : टीएस सिंहदेव

रायपुर। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान को लेकर पत्रकारवार्ता ली। उन्होने कहा कि प्लाज्मोडियम परजीवी से संक्रमित मादा एनोफिलिज मच्छर के काटने से स्वस्थ्य व्यक्ति को मलेरिया होता है। राज्य में मलेरिया मुख्य रुप से दो प्रकार पाये जाते है-पी.व्ही एवं पी.एफ.। यदि व्यक्ति में दोनों प्रकार के मलेरिया पाया जाता है उसे मिश्रित संक्रमण कहा जाता है। सही समय पर ईलाज करने से मलेरिया से मुक्ति मिल सकती है।

राज्य में मलेरिया की स्थिति

वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ तब राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) 16.80 था, जो कम होकर वर्ष 2019 में 1.97 है। वर्तमान में भारत का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) 0.21 है। परंतु आज भी बस्तर संभाग के 16 विकासखण्ड का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) 10 से अधिक है। राज्य में मलेरिया के कुल प्रकरणों में से 64 प्रतिशत प्रकरण आज भी बस्तर संभाग में पाये जाते है। मलेरिया उन्मूलन के लिए राज्य में पहली बार घर-घर पहुंच कर मॉस एक्टिव स्क्रीनिंग कि जा रही है।
राज्य में पहली बार बस्तर संभाग के मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों से मलेरिया परजीवी को समूल नष्ट करने हेतु अभियान चलाया जा रहा है। 15 जनवरी 2020 से 14 फरवरी 2020 तक बस्तर संभाग अतंर्गत उन सभी क्षेत्रों में जिनका वार्षिक परीजीवी सूचकांक 10 से अधिक है"मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के अंतर्गत मॉस एक्टिव स्क्रीनिंग एंड ट्रीटमेंट आफ मलेरिया किया जा रहा है। उक्त अभियान हेतु चिन्हांकित क्षेत्रों में दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा एवं नारायणपुर जिले के सभी विकासखण्ड, बस्तर जिले के दरभा, बस्तानार एवं तोकापाल विकासखण्ड एवं अन्य विकासखण्डों के 15 चिन्हांकित उप स्वास्थ्य केन्द्र, कांकेर व कोण्डागांव जिले के क्रमशः 10 व 14 उप स्वास्थ्य केन्द्र-सम्मिलित है। चिन्हांकित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग के दलों द्वारा घर-घर पहुंच कर सभी लोगों का आरडी टेस्ट द्वारा जांच एवं पूर्ण इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत सभी घरों के अलावा सभी आश्रम, स्कूल, पोटाकेबीन, अर्धसैनिक बल के कैम्प तथा जेल में भी स्क्रीनिंग एवं ईलाज का कार्य किया जा रहा है।
इस मॉस एक्टिव स्क्रीनिंग का प्रमुख उद्देश्य लक्षण रहित मलेरिया प्रभावित व्यक्तियों की पहचान कर उनका पूर्ण उपचार करना है,जिससे उनके शरीर से मलेरिया परजीवी को समूल नष्ट कर मलेरिया फैलने की संभावना को कम से कम किया जा सके।

 

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