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पितृ पक्ष की अंतिम तिथि को मनाया जाता है महालया पर्व, होती है दुर्गा पूजा की शुरुआत

यामिनी दुबे  | 17 Sep , 2020 01:21 PM
पितृ पक्ष की अंतिम तिथि को मनाया जाता है महालया पर्व, होती है दुर्गा पूजा की शुरुआत

रायपुर। पितृ पक्ष की आखिरी श्राद्ध तिथि को महालया पर्व मनाया जाता है। बंगाल के लोगों के लिए महालया पर्व का विशेष महत्‍व है। मां दुर्गा में आस्‍था रखने वाले लोग साल भर इस दिन का इंतजार करते हैं। महालया से ही दुर्गा पूजा की शुरुआत मानी जाती है। इस बार महालय अमावस्या की समाप्ति के बाद शारदीय नवरात्रि आरंभ नहीं हो सकेगा। आमतौर पर महालय अमावस्या के अगले दिन प्रतिपदा पर शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाती है। लेकिन इस बार अधिकमास के कारण नवरात्रि पितृपक्ष की समाप्ति के एक महीने बाद आरंभ होगा। महालया के दिन इसलिए भी खास है क्योंकि यही वह दिन होता है जब मूर्तिकार मां दुर्गा की आंखों को तैयार करता है। इसका अर्थ यह है कि महालया के बाद ही मां दुर्गा की मूर्तियों को अंतिम रूप दिया जाता है और पांडालों में मूर्तियां स्थापित की जाती है।   

महालया की मान्यताएं क्या है  :-

ऐसा कहा जाता है कि महालया अमावस्या के ही दिन मां दुर्गा की प्राकट्य हुई थी और उन्होंने इस धरती को पापियों से मुक्ति दिलाई थी। महालया त्यौहार के शुभ अवसर पर सभी लोग माँ दुर्गा की पूजा करते हैं। सभी लोग इस दिन अपने पूर्वजों की पूजा करते हैं और उन्हें खाना, नए कपड़े और मिठाईयां अर्पण करते हैं। यह त्यौहार दुर्गा पूजा का एक अभिन्न अंग है। माता दुर्गा को अपार शक्ति की देवी माना जाता है। यह त्यौहार और पूजा माता दुर्गा को पृथ्वी पर आमंत्रित करने के लिए मनाया जाता है।

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