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कैट ने नए तरीके से गणेश चतुर्थी मनाने लिया निर्णय,चीन को होगा 40 हजार करोड़ रुपए का नुकसान

रविशंकर शर्मा  | 16 Aug , 2020 05:52 PM
कैट ने नए तरीके से गणेश चतुर्थी मनाने लिया निर्णय,चीन को होगा 40 हजार करोड़ रुपए का नुकसान

रायपुर। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) अपने चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के राष्ट्रीय अभियान"भारतीय सामान-हमारा अभिमान" के तहत 22 अगस्त को गणेश चतुर्थी नए तरीके से मनाने जा रही है। कैट ने रविवार को मिट्टी, गोबर और खाद से बनी "पर्यावरण मित्र गणेश " की कुछ प्रतिमाएं जारी की हैं। इन प्रतिमाओं को देशभर के व्यापारी और अन्य लोग इस गणेश चतुर्थी को अपने-अपने घर में स्थापित कर पूजा करेंगे। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने कहा है कि इन वस्तुओं से बनी  गणेश प्रतिमा का उद्देश्य पर्यावरण और जल को प्रदूषित होने से बचाना है। इस त्यौहार को सही अर्थों में पूर्ण भारतीयता के साथ मनाना है। इस क्रम में 6 इंच, 9 इंच और 12 इंच की गणेश प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं। अनेक प्रतिमाओं में तुलसी के बीज सहित विभिन्न सब्जियों के बीज भी डाले जा रहे हैं। इससे प्रतिमा जल में विसर्जित करने के बाद यह बीज मिट्टी में दबकर पौधों का रूप ले सकेंगे। ये प्रतिमाएं घर में ही किसी बर्तन के कुंड में विसर्जित की जा सकती हैं।  इससे पर्यावरण और जल को दूषित होने से बचाया जा सकेगा।

पारवानी ने कहा है कि,पिछले वर्ष तक चीन से आए गणेश बड़ी मात्रा में देश भर में बिका करते थे, लेकिन इस वर्ष कैट ने देश भर में फैले व्यापारी संगठनों को सलाह दी है कि वो अपने शहर या राज्य में  कलाकृतियां बनाने वाले, कुम्हार आदि  स्थानीय लोगों से गणेश प्रतिमाएं मिट्टी, गोबर और खाद का उपयोग कर बनवाएं। साथ ही अपने व्यापारिक संगठनों के माध्यम से कर्मचारियों और अन्य लोगों तक बिक्री कर पहुंचाएं। इस प्रकार से कैट के बैनर तले देशभर के व्यापारी उन लोगों को रोजगार देने का काम कर रहे हैं,जिनके पास वर्तमान में या तो रोजगार की कमी है या कोरोना के कारण जिनका रोजगार छिन गया है। ऐसे लोगों की सहायता कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत में कैट के नेतृत्व में व्यापारी भी अपना योगदान देंगे।  

पारवानी ने कहा है कि अब से लेकर दिवाली तक देश में त्यौहारों का सीजन है। चीन से आयात हुआ लगभग 35 से 40 हजार करोड़ रुपए तक का सामान इस सीजन में बिकता है, जिनमें खास तौर पर भगवान की मूर्तियां, अगरबत्ती, खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल्स, बिजली  के बल्बों की झालर, बल्ब, सजावटी सामान, पीतल और अन्य धातुओं के दीपक, फर्निशिंग फैब्रिक, किचन इक्विप्मेंट, पटाखे, आदि शामिल हैं। इस वर्ष देशभर के व्यापारियों ने यह तय किया है कि, इस त्यौहारी सीजन में चीन का सामान न बेचेंगे बल्कि अपने देश में ही बना हुआ सामान बेच कर चीन को राखी के बाद, अब त्यौहारी सीजन का 40 हजार करोड़ रुपए का झटका देंगे।

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