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अच्छा है, खत लिखो खुदकुशी करो, भुगतने वाला भुगतता रहे

ग्लिब्स टीम  | 24 Sep , 2019 06:31 PM
अच्छा है, खत लिखो खुदकुशी करो, भुगतने वाला भुगतता रहे

रायपुर। क्या किसी का किसी पर महज आरोप लगा देना यह साबित कर देता है कि वह दोषी है? क्या किसी का किसी को भी अपनी मृत्यु के लिए जिम्मेदार ठहराना और पत्र लिख कर आत्महत्या कर लेना किसी व्यक्ति को दोषी साबित करने के लिए काफी है? क्या इसमें जांच तथ्य और प्रमाण की कतई आवश्यकता नहीं होती? क्या अपराध प्रमाणित होने से पहले ही किसी को उसका पक्ष जानते हुए भी दोषी की तरह व्यवहार करना न्याय संगत है? सभी प्रश्नों के उत्तर नहीं ही है तो भी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक प्रतिष्ठित व्यापारिक घराने के प्रमुख सुशील अग्रवाल के साथ इन दिनों ऐसा ही हो रहा है। उनके खिलाफ पिथौरा ठेकेदार श्याम सुंदर अग्रवाल ने 81 लाख रुपए नहीं देने का आरोप लगाते हुए पत्र लिखकर खुदकुशी कर ली थी। पुलिस ने इस मामले में तत्परता बरतते हुए जुर्म दर्ज कर लिया सुशील अग्रवाल के साथ ही मृतक श्याम सुंदर अग्रवाल ने एक अन्य व्यापारी पर भी करोड़ों रुपए नहीं देने के आरोप लगाए है। अब सवाल यह उठता है कि क्या श्याम सुंदर अग्रवाल को सुशील अग्रवाल से वाकई 81 लाख रुपए लेने थे ? क्या सुशील अग्रवाल ने वाकई श्याम सुंदर अग्रवाल को 81 लाख रुपए नहीं दिए थे?  क्या श्याम सुंदर अग्रवाल ने उन कथित बकाया 81 लाख रुपए के लिए सुशील अग्रवाल को कोई खत लिखा या फोन पर तकाजा किया था? क्या श्याम सुंदर अग्रवाल ने इस मामले की शिकायत किसी से की थी ? क्या श्याम सुंदर अग्रवाल के परिजनों की ओर से सुशील अग्रवाल पर 81 लाख रुपए बकाया होने के दस्तावेज या प्रमाण पुलिस के समक्ष प्रस्तुत किए गए? क्या पुलिस को प्रारंभिक जांच में सुशील अग्रवाल पर 81 लाख रुपए बकाया होने के प्रमाण मिले? हैरानी की बात यह है कि सुशील अग्रवाल के खिलाफ रकम नहीं देने का कोई भी दस्तावेज, तथ्य या साक्ष्य किसी के पास नहीं है फिर भी उन्हें दोषी साबित कर सजा देने के लिए ताकत लगाई जा रही है जबकि सुशील अग्रवाल ने प्रकरण सामने आते ही पिथौरा पुलिस को श्याम सुंदर अग्रवाल को दी गई सारी रकम की जानकारी दे दी थी। सुशील अग्रवाल ने श्याम सुंदर अग्रवाल को उनकी रकम  का किश्तवार लगातार भुगतान किया है। सुशील अग्रवाल ने 10 जुलाई 2019 को ही बकाया रकम 45 लाख, 82 हजार,240 रुपए  का अंतिम भुगतान बैंक के जरिए किया है। प्रकरण दर्ज होने के समय उन पर श्याम सुंदर अग्रवाल की कोई रकम बकाया नहीं थी। सुशील अग्रवाल ने श्याम सुंदर अग्रवाल को सारी रकम चेक के मार्फत दी। जिसका प्रमाण दोनों के बैंक खातों में हुए ट्रांजैक्शन से मिल सकता है और समस्त लेन-देन के दस्तावेजी प्रमाण सुशील अग्रवाल ने पुलिस को तत्काल सौंप दिए थे। सुशील अग्रवाल और श्याम सुंदर अग्रवाल के बैंक खातों की जांच करना तो दूर पुलिस ने उस तथ्य को संज्ञान में ही नहीं लिया और उसे अनदेखा किया। फिर वही सवाल सामने आ जाता है की तो फिर क्या सुशील अग्रवाल के खिलाफ मृतक श्याम सुंदर अग्रवाल के परिजनों ने कोई साक्ष्य प्रस्तुत किए? इसका भी जवाब नहीं ही है। यह है छत्तीसगढ़ जहां किसी पर भी किसी के भी आधारहीन आरोप कहर बनकर टूटते हैं और वह अपराध प्रमाणित होने से पहले ही सजा भुगतता है। जैसे सुशील अग्रवाल और उनका परिवार भुगत रहा है।

 

 

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