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सबूत के साथ गड़बड़ी मिलने के बावजूद कार्यवाही ना कर उड़ीसा के ठेकेदार पर क्यों मेहरबान हैं सिंचाई विभाग

अनिल पुसदकर  | 05 Jan , 2021 05:42 PM
सबूत के साथ गड़बड़ी मिलने के बावजूद कार्यवाही ना कर उड़ीसा के ठेकेदार पर क्यों मेहरबान हैं सिंचाई विभाग

रायपुर। छत्तीसगढ़ की  भूपेश बघेल सरकार छत्तीसगढ़ के स्थानीय बेरोजगार इंजीनियरों व ठेकेदारों को बढ़ावा देने के लिए भरपूर प्रयास कर रही है वही सिंचाई विभाग के अफसर उड़ीसा के एक बड़े ठेकेदार डीडी बिल्डर्स पर जाने क्यों मेहरबान है। छत्तीसगढ़ के ठेकेदारों का हक मारकर उड़ीसा का वो ठेकेदार करोड़ों रुपए के काम सरकार को गुमराह करके हासिल करने में सफल रहा है। और विभाग उस पर कार्रवाई करने की वजह है उसे संरक्षण दे रहा है।  हैरानी की बात तो यह है उड़ीसा के ठेकेदार डीडी बिल्डर्स के टेंडर की शिकायत बिलासपुर के एक अधिवक्ता ने विभागीय अफसरों से की साथ ही उसने मुख्यमंत्री से लेकर अन्य राजनेताओं तक इस बात को पहुंचाया। इस बात का सिंचाई विभाग के ओएसडी ने संज्ञान लिया और मामले की जांच करने के लिए सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता को पत्र भी लिखा लेकिन पता नहीं ऐसा क्या जादू है उड़ीसा के उस ठेकेदार में जो विभाग के अफसरों ने न उसके खिलाफ जांच की ना ही उसके खिलाफ कार्यवाही की और उल्टे उसे टेंडर देकर अनुग्रहित कर दिया। यहां तक तो ठीक है उड़ीसा के ठेकेदार को टेंडर दे दिया गया लेकिन वह टेंडर छत्तीसगढ़ के ठेकेदारों का हक मार कर दिया गया यह परेशान करने वाली बात है।

अब सवाल यह उठता है कि आखिर उस उड़ीसा के ठेकेदार पर विभाग मेहरबान क्यों है? उड़ीसा के ठेकेदार ने टेंडर के लिए बेहद जरूरी शपथ पत्र भी दिया है। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि नोटराइज्ड शपथ पत्र में उस ठेकेदार के हस्ताक्षर नहीं है। उस शपथ पत्र में ठेकेदार ने बड़ी सफाई से उड़ीसा में चल रहे बड़े-बड़े कामों को छुपा लिया और उसी आधार पर उसने यहां छत्तीसगढ़ में बड़ा टेंडर हासिल करने में सफलता हासिल कर ली। देखने वाली बात तो यह है कि उस ठेकेदार के खिलाफ गलत शपथ पत्र देने के कारण धोखाधड़ी का मामला दर्ज होना चाहिए था। उसे ब्लैक लिस्ट किया जाना चाहिए था। उसके खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा ना होकर उल्टे उसे टेंडर दे देना सारे विभाग पर शंका के बादल ला खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि सिंचाई विभाग के ओएसडी द्वारा कार्रवाई के लिए लिखे जाने के बावजूद सिंचाई विभाग के अफसरों द्वारा उड़ीसा के ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई न करने से सरकार क्या एक्शन लेती है। क्या उक्त ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई होगी? या फिर विभाग के उन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होगी? जो उसे संरक्षण दे रहे हैं अगर ऐसा नहीं होता तो फिर सिंचाई विभाग के साथ-साथ सिंचाई मंत्रालय भी सवालों के दायरे में आ जाएगा। लेटर देखने के लिए यहां क्लिक करें

 

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