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वन अधिकार पत्र वितरण में अनियमितता, भाजपा ने कलेक्टर से की जांच की मांग

रोशन वर्मा  | 23 Jul , 2021 01:13 PM
वन अधिकार पत्र वितरण में अनियमितता, भाजपा ने कलेक्टर से की जांच की मांग

अंबिकापुर। वन अधिकार पत्र वितरण में अनियमितता, फर्जीवाड़ा और हेरफेर को लेकर भाजपा ने जिला स्तरीय वन अधिकार समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर सरगुजा से इसकी जांच की मांग की है। भाजपा जिला अध्यक्ष ललन प्रताप सिंह के साथ त्रिलोक कपूर कुशवाहा, प्रबोध मिंज, आलोक दुबे अभिमन्यु गुप्ता, मधुसूदन शुक्ला एवं अजय सिंह ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। साथ ही अंबिकापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बधियाचूआ तथा खैरबार में महामाया पहाड़ी आरक्षित वन भूमि कक्ष क्रमांक 2582 तथा 2583 में वन अधिकार पत्र वितरण में फर्जीवाड़ा की जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि अपात्र व्यक्तियों का अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निकासी अधिनियम 2006 तथा अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी नियम 2008 यथा संशोधित 2012 के प्रावधान के विपरीत वन अधिकार पत्र दिया गया तथा इस प्रकार अवैध प्राप्त वन अधिकार पत्र की भूमि की बिक्री की जा रही है। इस पूरे प्रक्रिया में  शासकीय अधिकारी कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। वन अधिकार पत्र वितरण की प्रक्रिया अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी नियम 2008 तथा संशोधित 2012 में निहित है। बधिया चूआ एवं खैरबार पंचायत अंतर्गत वितरित वन अधिकार पत्र नियम एवं प्रक्रिया के विरुद्ध जारी किए गए हैं। प्रक्रिया में निहित कोई भी दस्तावेज तैयार नहीं किया गया है।


वन अधिकार पत्र वितरण की कानूनी प्रक्रिया एवं नियम पर बिंदुवार प्रश्न उठाते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष ने कहा कि अधिनियम की धारा 4 ( 4) के अनुसार वन अधिकार पत्र वंशागत होगा किंतु संक्रमणीय या अंतरण योग्य नहीं होगा, लेकिन वन अधिकार पत्र धारकों की ओर से यह भूमि दूसरे व्यक्ति के नाम से अंतरित की जा रही है, बेधड़क बेची जा रही है, जो अधिनियम का उल्लंघन है। दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध अधिनियम अंतर्गत कठोरतम दंडात्मक कार्यवाही करने एवं समस्त अपात्र एवं अवैधानिक तरीके से वितरित वन अधिकार पत्रों को निरस्त करने की मांग की गई है और ऐसा नहीं करने पर जन आंदोलन की चेतावनी दी गई है। इसकी पूरी जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी।

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