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आदिवासियों से साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा : राज्यपाल

नरेश भीमगज  | 15 Nov , 2019 07:34 PM
आदिवासियों से साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा : राज्यपाल

कांकेर-चारामा। गोंडवाना समाज चारामा द्वारा सर्व आदिवासी समाज समन्वय समिति के तत्वावधान में वीर पुरुष आदिवासी बिरसा मुण्डा की जयंती के अवसर पर आयोजित बुढ़ादेवधाम जैसाकर्रा स्थल में विशाल सभा में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ की  राज्यपाल अनुसूईया उइके शामिल हुईं। उन्होंने आदिदेव बुढ़ा देव सहित सभी आदिवासी देवों की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने गोटूल परम्परा के अंतर्गत बनाये गए गोटूल का भी समाज के मांझी मुखियाओं से मिलकर अवलोकन किया। राज्यपाल का स्वागत मुख्यद्वार से मुरिया नृत्य एवं संगीत से किया गया। कार्यक्रम में राज्यगीत 'अरपा पइरी के धार' की प्रस्तुति अंचल की गायिका क्षत्राणी जैन ने दी। स्वागत गीत आदिवासी परम्परा अनुसार सरोना की बालिकाओं ने पेश किया। स्वागत भाषण समाज के मुड़ादार जीवन ठाकुर ने  दिया तथा सामाजिक प्रतिवेदन अश्वनी कांगे ने पढ़ा।  सभा को पूर्व मंत्री अरविंद नेताम, मोहन मंडावी सांसद कांकेर ने भी संबोधित किया। सभी समाज प्रमुखों ने अपनी बातें आदिवासी क्षेत्र में उनके अधिकार दिलाने पर केंद्रित रखी। संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों को क्षेत्र विशेष में लागू करने की सभी ने विशेष मांग रखी। राज्यपाल अनुसूईया उइके ने अपने संबोधन में कहा कि नक्सली क्षेत्रों में निवासरत आदिवासियों से साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्हें रहने के लिए आवास, रोजगार व शिक्षा के नैतिक अधिकार दिलाना मुख्य उद्देश्य है। ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्रामसभा में पारित मामलों को उच्च तथा उच्चतम न्यायालय से भी बड़ा फैसला कहते हुए उसके परिपालन में राज्य व केन्द्र सरकार द्वारा मनाने की बात कही। सभा स्थल में उन्होंने पारंपरिक आदिवासी नृत्य भी किया। तत पश्चात पोटाई चौक पहुंचकर स्व. रामप्रसाद पोटाई संविधान निर्माण समिति के सदस्य की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा सामुदायिक भवन पहुंचकर संक्षेप में आदिवासी अधिकारी व कर्मचारी वर्ग के साथ संगोष्ठी में भाग लिया। इस अवसर पर समाज के प्रमुख जनप्रतिनिधि व समाज प्रमुखों सहित दूरस्थ ग्रामों से पहुंचे समाजजन उपस्थित थे। जिला प्रशासन के सभी उच्च अधिकारी  कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, डीएसपी, थाना प्रभारी व सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों ने विशेष रूप से व्यवस्था बनाने में सहयोग किया।

 

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