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ऐसे में कैसे ख़ात्मा करोगे नक्सलियों का जब खुद ही लड़ मर कर खत्म हो रहे हो

सोनम शर्मा  | 04 Dec , 2019 07:03 PM
ऐसे में कैसे ख़ात्मा करोगे नक्सलियों का जब खुद ही लड़ मर कर खत्म हो रहे हो

रायपुर। नारायणपुर के कड़ेनार की घटना ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के अनुशासित जवानों के गुट आपस में ऐसे भिड़े कि गोलियां चल गईं। इस खूनी संघर्ष में 6 जवान बेवजह मारे गए। उनकी मौत देश के लिए शहादत भी नहीं मानी जा सकती। इस वारदात को अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। जांच की लीपापोती के बाद फिलहाल जो तथ्य सामने आ रहा है वह  यह है कि ऐसे में कैसे खात्मा करोगे नक्सलियों का जब खुद ही लड़-मरकर खत्म हो रहे हैं? बेहद दुखद घटना हुई है इस पर कोई शक नहीं है। 6 जवान असमय काल के गाल में समा गए हैं। उनकी मौत के कारणों का पता लगाने के लिए सरकारी रटारटाया बयान जारी हो चुका है। जांच की जाएगी, कारण ढूंढे जाएंगे, कारण बताए जाएंगे, लेकिन इस वारदात ने एक बात तो साबित कर दी है कि सुरक्षा बलों में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ये दावा जरूर किया जा रहा है कि जवानों में विवाद था। लेकिन क्या कोई यह मान सकता है कि आपसी विवाद में 6 जवान मौत की नींद सो जाए? कहीं न कहीं गंभीर कारण छुपे हुए हैं जिन्हें ढूंढना और उनका निराकरण करना बहुत जरूरी है। अगर इस वारदात से सुरक्षाबलों का मनोबल गिरा होगा तो इसमें कोई शक नहीं कि सुरक्षाबलों के गिरते मनोबल से नक्सलियों का हौसला 100 गुना बढ़ा होगा। बात सिर्फ आईटीबीपी के जवानों के खूनी संघर्ष की नहीं है। बात सुरक्षा व्यवस्था में लगे बल में पनप रहे असंतोष के ज्वालामुखी की है जो धधक रहा है और जब फटता है तो कड़ेनार जैसी घटना सामने आती है। अब भी समय है, सुरक्षाबलों के जवानों से चर्चा होनी चाहिए। उनकी समस्याओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनकी समस्याओं का निराकरण किया जाना चाहिए। उन्हें अच्छा वातावरण दिया जाना चाहिए और उनका हौसला बढ़ाने के लिए जरूरी उपाय किए जाने चाहिए। अन्यथा कड़ेनार जैसी घटनाएं होती रहेंगी। जो हमारे जवानों को बेवजह निगलती रहेंगी और जवानों का मनोबल गिराने के साथ ही नक्सलियों का हौसला भी बढ़ाती रहेंगी।

 

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