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देश हम सभी का है तो ज़िम्मेदारी भी सभी की है : प्रकाशपुन्ज पाण्डेय

राहुल चौबे  | 19 May , 2020 09:14 PM
देश हम सभी का है तो ज़िम्मेदारी भी सभी की है : प्रकाशपुन्ज पाण्डेय

रायपुर। समाजसेवी व राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने वर्तमान स्थिति के मद्देनज़र मज़दूरों की इस हालत का कसूरवार केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार को ठहराया है। उन्होंने कहा है कि नोटबंदी की तरह ही देश में लॉकडाउन का निर्णय भी पूर्णतः बिना तैयारी के लिया हुआ एक गैरजिम्मेदाराना कदम था,जिसका खामियाज़ा आज पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है। जब लॉकडाउन करना ही था तो मोदी सरकार को सबसे पहले सभी मंत्रियों से, उनके सलाहकारों से साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के तमाम मुख्यमंत्रियों से सलाह लेनी थी। और भी उचित होता अगर पूर्व प्रधानमंत्रियों, पूर्व मंत्रियों, विपक्षी दलों, पत्रकारों और समाज के तमाम समाजसेवी व बुद्धिजीवी वर्ग की भी सलाह लेते। अगर जो ऐसा हुआ होता तो शायद देश में आज ऐसी विकट परिस्थितियाँ उत्पन्न ना होतीं और ना ही कोई किसी को दोष दे पाता।पाण्डेय ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही चरमराई हुई थी लेकिन लॉकडाउन के बाद यह और जर्जर हो चुकी है लोगों के पास पैसे नहीं है, खाने के लिए संसाधनों की कमी है। यही नहीं लोगों में कोरोनावायरस के कारण जो डर उत्पन्न हो गया है वह भी सबसे बड़ा कारण है कि आज देश में एक असमंजस की स्थिति बनी हुई है। किसी को नहीं समझ रहा है कि आगे ऐसे कब तक जीना पड़ेगा? ऐसे कब तक विपरीत परिस्थितियों में काम करना पड़ेगा?

अगर इन सब चीजों के बारे में पहले से ही डिजास्टर कंट्रोल की तैयारी की गई होती तो शायद यह दिन नहीं देखना पड़ता। उसके ऊपर मज़दूरों का मीलों पैदल चलना और देश के जगह-जगह से उनकी मौत की ख़बरें आना और पीड़ादायक है। दिल बैठ जाता है देख कर जब किसी मज़दूर की घर वापसी के दौरान मौत की खबर आती है। लेकिन इसी बीच कोरोना वायरस के प्रकोप पर भी कोई रोकथाम होती नहीं दिखती क्योंकि जब लॉकडाउन 1 किया गया था तब कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 500 थी और अब वह बढ़कर एक लाख पहुंच चुकी है। यह अच्छी बात है कि उसमें से कई लोग ठीक भी हो रहे हैं, लेकिन उसके कारण लोग मर भी तो रहे हैं। आज भी यह प्रश्न बना हुआ है कि जब कोरोना वायरस की कोई दवा बनी ही नहीं है तो लोग ठीक कैसे हो रहे हैं इस बात को अगर सरकार समझाने में कारगर हो जाती तो शायद लोग और भी संभल जाते पर आज तिथि बहुत ही विकट बन चुकी है।

 

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