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फ्रंटलाइन वर्कर बता रहे आयोडीन का महत्व, आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण सप्ताह 27 तक

राहुल चौबे  | 24 Oct , 2020 10:16 AM
फ्रंटलाइन वर्कर बता रहे आयोडीन का महत्व, आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण सप्ताह 27 तक

रायपुर/बैकुठपुर। फ्रंटलाइन वर्कर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका व मितानिनों के सहयोग से आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण सप्ताह के तहत विभिन्न माध्यमों से जनसमुदाय विशेषकर गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के लिए आयोडीन की आवश्यकता के महत्व को बताया जा रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज खलखो ने बताया कि प्रतिवर्ष 21 अक्टूबर को वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार निवारण दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष कोविड-19 महामारी को देखते हुए जिले में 21 अक्टूबर से कोरोना वायरस और आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान 27 अक्टूबर तक जनजागरूकता से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं। 

सीएमएचओ डॉ. रामेश्वर शर्मा ने बताया कि आयोडीन की कमी का सर्वाधिक असर गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को होता है। गर्भवती महिलाओं में आयोडीन की कमी से गर्भपात, नवजात शिशुओं का वजन कम होना, शिशु का मृत पैदा होना और जन्म लेने के बाद शिशु की मृत्यु होना आदि होते हैं। वहीं शिशुओं में आयोडीन की कमी से बौद्धिक और शारीरिक विकास समस्याएं होती हैं। सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में विशेष रूप से आयोडीन युक्त नमक एवं खाद्य पदार्थों के सेवन के प्रति जनजागरूकता के कार्यक्रम हो रहे हैं। 

जाने आयोडीन का महत्व : 
शरीर में आयोडीन की कमी से मुख्य रूप से घेंघा रोग होता है। आयोडीन सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो मानव वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक है। आयोडीन बढ़ते शिशु के दिमाग के विकास और थायराइड प्रक्रिया के लिए अनिवार्य माइक्रो पोषक तत्व है। आयोडीन शरीर के तापमान को नियमित करता है, विकास में सहायक है। आयोडीन अल्पता विकार एवं आयोडीन युक्त नमक एवं खाद्यपदार्थों के सेवन के प्रति जनजागरूकता बेहद जरूरी है।

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