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बहुचर्चित किशनपुर हत्याकांड के घटना स्थल की फॉरेंसिक एक्सपर्ट करेंगे पुन: जांच, महिला आयोग करेगा खर्च वहन

रविशंकर शर्मा  | 13 Jan , 2021 10:03 PM
बहुचर्चित किशनपुर हत्याकांड के घटना स्थल की फॉरेंसिक एक्सपर्ट करेंगे पुन: जांच, महिला आयोग करेगा खर्च वहन

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने बुधवार को महासमुंद में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर जन-सुनवाई की। सुनवाई में 16 प्रकरण रखे गये थे। इसमें 13 प्रकरण सुनवाई के पूर्व रजामंदी होने के कारण नस्तीबद्ध किया गया। इसी प्रकार 7 प्रकरणों को भी रजामंदी और सुनवाई योग्य नही होने के कारण नस्तीबद्ध किया गया। डॉ. नायक ने महिलाओं को समझाइश दी कि  घरेलू आपसी मनमुटाव का समाधान परिवार के बीच किया जा सकता है। घर के बड़े बुजुर्गों का सम्मान एवं आपसी सामंजस्य सुखद गृहस्थ के लिए महत्वपूर्ण है। पिथौरा विकासखंड के आवेदकों ने पुलिस अधिकारियों और चार अन्य लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की। आवेदकों ने बताया कि किशनपुर हत्याकांड के मामलें में पुलिस अधिकारियों ने समुचित जांच नहीं करने की जानकारी दी। इस प्रकरण पर महिला आयोग ने तीन साल पुराने मामलें की निष्पक्ष तरीके से जांच कराने कहा। महिला एवं बाल विकास विभाग के व्यय पर फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. सुनंदा ढेंगे को नियुक्त किया गया है। उनके सहयोग के लिए आयोग की अधिवक्ता शमीम रहमान और एसडीओपी अपूर्वा सिंह को दो माह के भीतर विस्तृत जांच कर रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। इस संबंध में आवश्यकतानुसार न्यायालय से अनुमति प्राप्त की जाएगी।इसी तरह एक अन्य मामले में पिथौरा के आवेदिका ने पटवारी पुत्र को मानसिक प्रताड़ना व भरण पोषण की राशि दिलाने की मांग की। आयोग ने अनावेदक को आपसी रजामंदी से प्रत्यके माह की पहली तारीख को 8,000 रुपए आवेदिका के खातें आरटीजीएस के माध्यम से जमा करने कहा। स्वयं अपने विभाग में आवेदन देकर लिखित सहमति प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके अलावा आवेदिका को अनावेदक के घर पर किसी भी प्रकार की दखल अंदाजी नहीं करने के निर्देश दिए। इस पर दोनों पक्षों ने सहमति जताई। इसके अलावा पिथौरा के आवेदिका ने अनावेदक के खिलाफ दैहिक शोषण की शिकायत की थी।  इस पर अध्यक्ष ने दोनो पक्षो को गंभीरता से सुनने के बाद पति-पत्नि को सुलह के साथ रहने की समझाइश दी।एक अन्य प्रकरण में महिला आवेदक ने दैहिक शोषण का आरोप लगाया। इस पर आयोग ने दोनों पक्षोें की बातों को गंभीरता पूर्वक सुनकर अनावेदिका को भरण-पोषण के लिए एकमुश्त 1,60,000 (एक लाख 60 हजार रूपए) की राशि देने के निर्देश दिए।  इस पर आवेदक एवं अनावेदिका पक्ष ने आयोग के समक्ष आपसी रजामंदी में तलाक लेने की बात भी स्वीकार की।
जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित सुनवाई में मुख्य रूप से महिलाओं से मारपीट, मानसिक, शारीरिक, दैहिक प्रताड़ना, कार्यस्थल पर प्रताड़ना, दहेज प्रताड़ना, से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान अपर कलेक्टर जोगेन्द्र कुमार नायक अतिरिक्त पुलिस अधिक्षक मेघा टेंबुलकर, डिप्टी कलेक्टर बीएस मरकाम, सीमा ठाकुर, प्रशिक्षु डीएसपी अपूर्वा सिंह, शासकीय अधिवक्ता शमीम रहमान सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

 

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