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फ़ूड सेफ्टी अथॉरिटी के नए नियम छोटे व्यापरियों के लिए आर्थिक महामारी : कैट

राहुल चौबे  | 20 Sep , 2020 09:10 PM
फ़ूड सेफ्टी अथॉरिटी के नए नियम छोटे व्यापरियों के लिए आर्थिक महामारी : कैट

रायपुर। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)के प्रदेश अध्यक्ष अमर परवानी,कार्यकारी अध्यक्ष मंगेलाल मालू,विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोषी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल, प्रवक्ता राजकुमार राठी ने बताया कि फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी द्वारा हाल ही लागू किए गए एक क़ानून से देश भर में लगभग 2 करोड़ छोटे  दुकानदार बुरी तरह प्रभावित ही वे जिसके कारण इन व्यापारियों के व्यवसाय का 75 प्रतिशत से अधिक  व्यापार ख़त्म होगा और प्रति वर्ष लगभग 15 लाख करोड़ रुपए का व्यापार समाप्त हो जाएगा । केंद्र सरकार की हालिया अधिसूचना के कारण ये छोटे व्यापारी,जो पहले से ही कोरोना महामारी से बुरी तरह से परेशान उन्हें फ़ूड अथॉरिटी के नए क़ानून से अब आर्थिक महामारी का सामना करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

कैट ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ.हर्षवर्धन और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र भेजकर FSSAI के नियमों को वापस लेने की मांग की है।कैट ने कहा कि खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 4 सितंबर को जारी एक अधिसूचना में  खाद्य सुरक्षा और मानक (स्कूल में बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और संतुलित आहार) नियम को लागू किया,जिसमें यह कहा गया की "खाद्य उत्पाद जिसमें किसी भी प्रकार से चर्बी बढ़ाने की सम्भावना है अथवा चीनी या सोडियम से युक्त कोई भी सामान किसी भी स्कूल के गेट से किसी भी दिशा में पचास मीटर के दायरे में स्कूल परिसर में या स्कूली बच्चों के लिए सामान बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कैट ने इन विनियमों का कड़ा विरोध करते हुए इसे "बर्बर नियम" करार दिया और कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकल पर वोकल और आत्मनिर्भपर भारत के आह्वान का उल्लंघन करता है। यह क़ानून छोटे व्यापारियों का व्यापार छीनेगा और सरकारी अधिकारियों की गैर-संवेदनशीलता को दर्शाता,जो देश के घरेलू व्यापार को अस्थिर करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कैट ने कहा की एफएसएसएआई का यह नियम इस बात को स्पष्ट करता है की यह एक निरंकुश और तानाशाह के रूप में है किसी भी नियम या विनियम लाने से पहले कभी भी हितधारकों से परामर्श नहीं करता है।कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने कहा कि देश में लगभग 2 करोड़ छोटी दुकानों/विक्रेताओं में ज्यादातर पड़ोस की दुकान हैं, जैसे कि जनरल स्टोर्स, पान की दुकानें, किराना दुकानें और अन्य छोटी और छोटी दुकानें हैं।

ये सभी प्रकार की एफएमसीजी वस्तुओं की आवश्यकता को पूरा करते हैं और जो ख़ासतौर पर खाद्य और पेय पदार्थ,किराना,व्यक्तिगत और घरेलू देखभाल की चीजें शामिल हैं। ग्राहक की आवश्यकता को पूरा करने के लिए यह दुकानें बेहद महत्वपूर्ण नियमों के अनुसार किसी को भी किसी भी उत्पाद को बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पारवानी ने कहा कि इन पड़ोस की दुकानों ने लॉक डाउन के समय लोगों की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सबसे ज़्यादा भूमिका निबाही हैं। इन दुकानों को खाद्य और पेय उत्पादों को रखने की अनुमति नहीं देने तथा अन्य वस्तुओं की बिक्री को ख़त्म करने और ग्राहक आधार को खोने के लिए मजबूर करेंगे। व्यापार तहस बहस हो जाएगा। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर दुकानदार उत्पादों की एक पूरी श्रृंखला उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं हैं, तो ग्राहकों के कदम इन दुकानों में बिलकुल नहीं पड़ेंगे। कैट ने सरकार से मांग की है कि वह इस गैर-व्यावहारिक नियमों और विनियमों को वापस ले जो एक व्यक्ति के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। मौजूदा परिस्थितियों के कारण सरकार रोजगार देने में सक्षम नहीं है, जबकि FSSAI लोगों को उनके मौजूदा व्यवसायों से वंचित करने के लिए अडिग है। इसके लिए फ़ूड अथॉरिटी की जितनी आलोचना की जाए वो कम है।

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