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महात्मा गांधी नरेगा की डबरी से सिंचाई सुविधा का लाभ लेकर साल भर सब्जी उत्पादन कर रहा किसान

यामिनी दुबे  | 18 Jun , 2021 05:11 PM
महात्मा गांधी नरेगा की डबरी से सिंचाई सुविधा का लाभ लेकर साल भर सब्जी उत्पादन कर रहा किसान

कोरिया/रायपुर। मेहनत करने वालों के लिए राहें खुद बन जाती हैं। ग्राम पंचायत रोझी में रहने वाले किसान धर्मपाल के परिवार पर यह कहावत चरितार्थ होती है। पहले महात्मा गांधी नरेगा के अकुशल श्रम पर आश्रित धर्मपाल का परिवार अब अपने खेतों में सब्जी उत्पादन कर पूरी तरह से आजीविका के स्थाई साधन से जुड़ गया है। इनके खेतों में होने वाली सब्जी की उपज से इन्हे प्रतिमाह औसतन 12 से 13 हजार रुपए की आय होने लगी है। धर्मपाल के परिवार को रोजगार के अवसरों के लिए परेशान नहीं होना पड़ता है और साथ ही दैनिक खर्च के लिए आवश्यक धनराशि की समस्या से भी निजात मिल गई है। महात्मा गांधी नरेगा के तहत पंजीकृत इस श्रमिक परिवार को अब रोजगार की कोई चिंता नहीं है। महात्मा गांधी नरेगा के तहत बनी डबरी से अब इनकी हर समस्या आसानी से सुलझ रही है। मुस्कुराते हुए धर्मपाल बतलाते हैं कि अब कोनो चिंता नई है। डबरी के पानी ले मस्त सब्जी होवत है और केल्हारी बाजार में तुरत बिक जाथे। अपने गांव से महज पांच किलोमीटर दूर लगने वाले साप्ताहिक बाजार के अलावा ज्यादा फसल होने पर दैनिक रूप से भी यह परिवार अपनी सब्जियों को बेचकर अपना दैनिक खर्च आसानी से पूरा कर रहा है।

महात्मा गांधी नरेगा की मदद से एक पंजीकृत श्रमिक परिवार के सफलता की यह कहानी मनेन्द्रगढ़ जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत रोझी की है। यहां एक किसान परिवार के मुखिया धर्मपाल अपने बेटों उदयपाल और अजयपाल के साथ रहते हैं। इनके परिवार में कुल आठ सदस्य हैं और घर में महात्मा गांधी नरेगा के तहत इनके पास दो जाबकार्ड हैं। धर्मपाल ने बताया कि इनके पास कुल पांच एकड़ भूमि है, जिसमें यह पहले केवल धान व गेंहू की फसल लगाते थे। परंतु उपज उतनी नहीं होती थी कि साल भर का दैनिक खर्च भी निकाल सकें। खेती के बाद इनके पास कोई अन्य रोजगार का साधन नहीं होने से इनके परिवार के सभी वयस्क सदस्य महात्मा गांधी नरेगा के रोजगारमूलक कार्यों पर ही आश्रित रहते थे। ग्राम पंचायत में आयोजित ग्राम सभा से इन्हे महात्मा गांधी नरेगा के तहत बनाए जानी वाली डबरी की जानकारी होने पर इन्होंने अपने खेतों में डबरी बनाने का आवेदन ग्राम पंचायत को दिया। इनके परिवार को वित्तीय वर्ष 19-20 में ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत निजी भूमि में डबरी निर्माण कार्य एक लाख छियासी हजार की राशि से निर्माण के लिए स्विकृत किया गया। धर्मपाल बतलाते हैं कि कार्य प्रारंभ होने से गत वर्ष लॉकडाउन के दौरान उन्हे और उनके परिवार के सदस्यों को गांव में ही रोजगार का अवसर मिल गया और इनकी स्वयं की सिंचाई की सुविधा भी तैयार हो गई।

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