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जिला जेल में बंदियों को दी गई नशा छोड़ने की समझाइश, नियमित अभ्यास पर जोर 

जिला जेल में बंदियों को दी गई नशा छोड़ने की समझाइश, नियमित अभ्यास पर जोर 

महासमुंद। दिग्भ्रमित हो कर गलत रास्तों की ओर बढ़ चुके बंदियों में नैतिक विकास के लिए राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम एवं अभियान नवजीवन के अंतर्गत जिला जेल में नशा उन्मूलन जागरुकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसपी वारे के निर्देशन व जिला कार्यक्रम प्रबंधक संदीप ताम्रकार के मार्गदर्शन में शासकीय सामाजिक कार्यकर्ता असीम श्रीवास्तव ने सैकड़ा भर से अधिक बंदियों को नशे के दुष्परिणाम बताते हुए इनसे दूरी बनाए रखने की समझाइश दी। तकरीबन 30 से अधिक की संख्या में बंदियों ने अपनी परेशानी साझा करते हुए पूछा कि नशा छोड़ते समय होने वाली बेचैनी से कैसे निपटा जाए। 

पंक्तिबद्ध रूप से बारी-बारी मरीजों के रक्तचाप और मधुमेह सहित अन्य बीमारियों की जांच कर रहे गैर संचारी रोग विभाग के नोडल अधिकारी डॉ अनिरुद्ध कसार ने उन्हें इससे उबरने के लिए कार्यक्रम द्वारा निशुल्क प्रदाय की जाने वाली एन्टी टोबैको च्यूइंगम और पैचेस के जरिए नियमित अभ्यास करने  की सलाह दी। जेल के चिकित्सा अधिकारी डॉ .अमित कुमार प्रसाद ने समझाया कि डायरी अंकन कर 3 महीने तक नशा छोड़ने का प्रयास करने वालों को सफलता जरूर मिलती है और सलाहकारों द्वारा बताए गए तरीकों पर अमल करने से कोई परेशानी नहीं आती। बढ़ते क्रम में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के योग प्रशिक्षक देव कुमार डडसेना ने बंदियों को संतुलित आहार-विहार से शरीर और योग, ध्यान एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेकर स्वयं को तनाव-मुक्त रखने के गुण सिखलाए। उक्त जागरुकता कार्यशाला सह चिकित्सा जांच शिविर में शताधिक बंदियों सहित जेल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने रुचिपूर्वक भाग लिया। स्वास्थ्य विभाग से स्टाफ नर्स त्रिवेणी चक्रधारी, लैब टैक्नीशियन कु दुर्गा पटेल का सहित जेल के प्रधान प्रहरी एवं स्टाफ का योगदान उल्लेखनीय रहा।

इस दौरान सहायक जेल अधीक्षक ने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. छत्रपाल चंद्राकर से चर्चा कर उन कैदियों के लिए शिविर आयोजन का प्रस्ताव रखा जो विभिन्न प्रकार के नशे के आदी होते हैं। जेल में प्रवेश करते ही एकाएक नशीले पदार्थ मिलने बंद हो जाने से संतुलन खोकर स्वयं को नुकसान पहुंचाने का प्रयास भी कर लेते हैं। समस्या निराकरणके लिए प्रत्येक माह एक दिवसीय शिविर जांच एवं आवश्यक दवा वितरण किए जाने पर मौखिक रूप से सहमति बनी। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद इससे निपटने के लिए जेल स्टाफ को भी प्रशिक्षित किया जाएगा।

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