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बारदाने की कमी के कारण किसान नहीं बेच पा रहे धान,व्यवस्था होने पर ही टोकन देने की बात

बारदाने की कमी के कारण किसान नहीं बेच पा रहे धान,व्यवस्था होने पर ही टोकन देने की बात

महासमुंद। धान खरीदी को अब 8 दिन ही बचे हैं, लेकिन धान संग्रहण केन्द्रों में अब भी बारदाने की समस्या बरकरार है। सैकड़ों किसानों के अब तक धान नहीं बिके हैं। किसान बारदाना नहीं होने की वजह से कई समितियों में धान नहीं बेच पा रहें हैं। मिलरों की ओर से समितियों को दिया गया बारदाना इतना खराब है कि उसका उपयोग किसान नहीं कर पा रहे हैं। बेलसोढ़ा के किसानों का कहना है कि फटे पुराने बारदानों में ही छांट-छांट कर अपने धान बेचने के लिए सिलाई कर धान बेच रहे हैं। कुछ किसान धान बेचने के लिए बाजार से बारदाना खरीदकर धान बेच रहे हैं। किसानों ने बताया कि 35 रुपए की लागत से किसान बारदाना बाजार से खरीद रहे हैं, जिसके एवज में किसानों को 15 रुपए बारदाने का कीमत दी जा रही है। बेलसोढ़ा धान संग्रहण केन्द्र पहुंचे लगभग दो दर्जन किसानों ने जानकारी दी है कि बारदाने की वजह से वह सुबह से अब तक समिति के प्रबंधन का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन धान बेचने टोकन नहीं कट पा रहा है। 
किसान पुनीत राम चंद्राकर नेकहा कि वे छोटे किसान हैं,सिर्फ 58 कट्टा धान है, जिसे वे अब तक बेच नहीं पाए हैं।

समिति के अधिकारियों का कहना है कि बारदाना नहीं है, इसलिए टोकन नहीं मिलेगा। व्यवस्था होगी तब टोकन उपलब्ध कराया जाएगा। कई और किसानों ने भी इसी तरह की शिकायत बताई है। बेलसोढ़ा धान संग्रहण केन्द्र के प्रबंधक ने बताया कि समिति को 2 लाख कट्टा धान खरीदना है और अब तक 1 लाख 40 हजार कट्टा धान की खरीदी हुई है। अब भी 60 हजार कट्टा लगभग खरीदना बाकी है। समिति प्रबंधन ने यह भी जानकारी दी है कि प्रतिदिन लगभग 6 हजार कट्टा धान की खरीदी शुरूआत में की जा रही थी, लेकिन बारदाने की समस्या के कारण 6 हजार कट्टा धान की खरीदी नहीं हो पा रही है। आगामी 8 दिनों में 6 हजार कट्टा धान भी खरीदा जाएगा। तब भी 60 हजार कट्टा धान की खरीदी मुश्किल लग रही है। बता दें कि महासमुंद शहर से लगा ग्राम बेलसोढ़ा धान संग्रहण केन्द्र में  5 गांव के किसान अपना धान बेचेंगे। इस धान संग्रहण केन्द्र में बेससोढ़ा, नांदगांव, मुढ़ेना, घोड़ारी और साराडीह के किसान धान बेच रहे हैं। 1 दिसंबर से धान की खरीदी शुरू हुई है तब से लेकर अब तक समितियों में बारदाने के लाले पड़े हैं।

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