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हड्डी जोड़ने वाले डॉ.पाठक की घूमती गेंदे चूके तो हड्डियां चटखा देती थी, हॉकी के खिलाड़ी का टेनिस तक सफर

अनिल पुसदकर  | 11 Apr , 2020 05:56 PM
हड्डी जोड़ने वाले डॉ.पाठक की घूमती गेंदे चूके तो हड्डियां चटखा देती थी, हॉकी के खिलाड़ी का टेनिस तक सफर

रायपुर। क्रिकेट का जादू जब सिर पर चढ़कर बोलने लगा था तब शहर में क्रिकेट के एक से बढ़कर एक सितारे हुए उनमें से एक है डॉ.अजय पाठक। अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ.पाठक आज हड्डियां जोड़ते हैं लेकिन एक समय था कि अपनी फिरकी यानी स्पिन गेंद से भी अच्छे से अच्छे बल्लेबाज की हड्डियां चटकाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे। ऊंची कद काठी का फायदा उन्हें मिलता था। अपनी ऑफ ब्रेक के बीच वे फास्टर वन फेंक कर बल्लेबाज को चकमा दे देते थे। उनकी फास्टर वन कमाल की व अचूक होती थी। सितारों से सजी साइंस कॉलेज की टीम को तो उन्होंने बिलासपुर में अकेले अपने दम पर करारी शिकस्त दी थी। उस मैच में मेडिकल कालेज की ओर से खेलने वाले अकेले स्टार प्लेयर थे। स्कूल से ही अजय पाठक का खेलों के लिए जबरदस्त रुझान था। हॉकी क्रिकेट के अलावा भी स्कूल में वे फुटबॉल भी खेलते थे। कॉलेज पहुंचे तो फुटबॉल छूटा और क्रिकेट और हॉकी में वे रविशंकर विश्वविद्यालय की टीम के लिए चुने गए। मेडिकल की पढ़ाई के कारण हॉकी भी छूट गई लेकिन क्रिकेट से प्यार उनका बना रहा। विश्वविद्यालय की टीम से शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें विजी ट्रॉफी के लिए चुना गया था। उन्होंने इंटर यूनिवसिर्टी टूर्नामेंट में शानदार शतक भी जड़ा था। विजी ट्राफी के अलावा उनका रणजी ट्राफी में भी चयन हुआ था लेकिन मेडिकल कालेज की पढ़ाई भी उनके लिए तब जरूरी थी। अपने समय के बेहतरीन ऑलराउंडर रहे अजय पाठक। उनकी फास्टर वन उनका अचूक हथियार थी जो बल्लेबाज के समझ में नहीं आती थी। या तो वो स्टम्प चटखाती थी सेट और अगर अंदर घुसी तो पसली और सामने निकले पैर पर गहरी मार करती थी। समय बदला तो क्रिकेट भी छूटता चला गया और वे लॉन टेनिस में हाथ आजमाने लगे। लॉन टेनिस में भी उन्होंने अखंड मध्यप्रदेश की ओर से और छत्तीसगढ़ की ओर से सिविल सर्विसेस टूर्नामेंट में अपनी खेल प्रतिभा का परिचय दिया। अजय एक समय मेडिकल कॉलेज के अजेय बल्लेबाज हुआ करते थे। अपने समय के शानदार चमकते सितारे रहे हैं वे। आज का गॉस मेमोरियल ग्राउंड तब क्रिकेट मैचों के लिए मशहूर हुआ करता था। तब शहर के अलावा आसपास के कस्बो से भी लोग यंहा मैच देखने आया करते थे और उस दौर में डॉ.अजय पाठक का भी अपना एक बड़ा फैन ग्रुप हुआ करता था। उस दौर में वे क्रिकेट प्रेमियों के चहेते खिलाड़ियों में से एक थे। खेलों के अलावा डॉ.अजय पाठक संगीत प्रेमी भी है, सुरों को भी उन्होंने साध रखा है अच्छा गाते तो है सिटी भी बहुत ही सुरीली बजाते है,कभी मौका मिले तो इस फन का भी आनन्द भी आप चाहे तो उठा सकते हैं।

 

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