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सोसायटी का मुख्यालय देवरी सिर्फ कागजों में मुख्यालय पर नहीं खुला धान उपार्जन केन्द्र

राहुल चौबे  | 26 Nov , 2020 10:23 AM
सोसायटी का मुख्यालय देवरी सिर्फ कागजों में मुख्यालय पर नहीं खुला धान उपार्जन केन्द्र

रायपुर। 62 वर्षों पहले सन् 1958 में 15 ग्रामों के लिए बनाए गए सोसायटी का मुख्यालय देवरी सिर्फ कागजों में मुख्यालय का गौरव पाता रहा और मुख्यालय का सुख ग्राम गुल्लु भोगता रहा। सोसायटियों के पुनर्गठन के बाद इस सोसायटी को 4 भागों में विभक्त कर देवरी सोसायटी में 4 ग्रामों को समाहित करने के बाद बीते दिनों सोसायटी मुख्यालय का सुख उद्घाटन पश्चात इस ग्राम को मिला पर शासन के नीति के बाद भी इस मुख्यालय ग्राम में धान उपार्जन केन्द्र न बनाए जाने को ले ग्रामीणों में आक्रोश है। गौरतलब है कि सन् 1958 में रायपुर केन्द्रीय सहकारी बैंक के आरंग शाखा के अधीन आने वाले 15 ग्राम देवरी, गुखेरा, परसकोल, बाना, बनारसी , गुमा, गुल्लु, अमेठी, गुदगुदा, अकोलीकला, चपरीद, कुसद, रानी सागर व समोदा को मिला। एक सोसायटी गठित करते हुए इनका मुख्यालय ग्राम देवरी को बनाया गया था पर बीते 58 वर्षों के दौरान यह ग्राम महज नाम का ही मुख्यालय बना रहा व मुख्यालय की सुविधा का लाभ व उपभोग ग्राम गुल्लु ही करता रहा। इतना ही नहीं वरन धान उपार्जन केन्द्र भी इस मुख्यालय ग्राम को छोड़ अन्य 3 ग्राम गुल्लु, चपरीद व बाना में खोला गया था।

वर्तमान प्रदेश सरकार के मंशा के ‌‌‌अनुरुप प्रदेश के सोसायटियों के पुनर्गठन के चलते इस देवरी सोसायटी को‌ भी पुनर्गठित कर 4 नया सोसायटी बनाया गया है व इस‌ देवरी सोसायटी में 4 ग्राम देवरी, घोंट, गुखेरा व परसकोल को शामिल कर अन्य 11 ग्रामों को 3 नये सोसायटी बाना, गुल्लु व चपरीद बना इनके कार्यक्षेत्र में दे दिया गया है। बीते दिनों सोसायटियों के पुनर्गठन संबंधी आदेश ‌‌‌जारी होने के बाद इस मुख्यालय ग्राम देवरी के ग्रामीणों को आशा‌ थी कि मुख्यालय ग्राम होने का वास्तविक सुख मिलने के साथ-साथ यहां धान उपार्जन केन्द्र को सौगात भी अब शासन के दिशा-निर्देश के अनुरूप अवश्य ‌‌‌मिलेगा पर कुछ दिन पहले क्षेत्रीय विधायक व नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया द्वारा मुख्यालय कार्यालय का उद्घाटन करने से ग्रामीणों को मिली खुशी उस समय आधी अधूरी रह गई‌

जब शासन ने धान उपार्जन केन्द्र की सौगात मुख्यालय ग्राम को न दे आश्रित ग्राम परसकोल को दे दी। इससे ग्रामीणों में व्याप्त असंतोष को स्वीकारते हुए सरपंच उषादेवी साहू कहती हैं कि विभागीय मांग पर पंचायत ने केन्द्र खोलने 5 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी पारित कर सौंप दिया था पर शासन ने देवरी के बदले परसकोल में केन्द्र खोलने का निर्णय क्यों लिया इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने परसकोल में केन्द्र खोलने पर ग्रामवासियों को कोई आपत्ति न होने की जानकारी देते हुए कहा कि ग्रामीणों की भावना मुख्यालय ग्राम की महत्ता व गौरव को देखते हुए इस ग्राम में एक‌ और अतिरिक्त केन्द्र खुलवाने की है जैसा कि  पूर्व में भी इसी सोसायटी में तीन केन्द्र खोलकर किया गया था। इधर इस संबंध में कतिपय ग्रामीणों ने किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेन्द्र शर्मा से भी मुलाकात की जिन्होंने राजनैतिक अथवा प्रशासनिक कारणों से यह निर्णय लिये जाने की संभावना व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के निर्णय का प्रत्यक्ष उदाहरण आरंग ब्लाक है जिसका कि मुख्यालय चंदखुरी ग्राम है पर तात्कालिक राजनीतिक दबाव के मद्देनजर इसे आरंग में स्थापित कर दिया गया व अब शासन -प्रशासन इस मुख्यालय को चंदखुरी में स्थानांतरित न कर ब्लाकों के पुनर्गठन पर चंदखुरी को नया ब्लाक बनवाने का दावा कर‌ रहा है। उन्होंने ग्रामीणों को डहरिया सहित जिला प्रभारी मंत्री रवीन्द्र चौबे, खाद्य मंत्री अमरजीत सिंह भगत व सहकारिता मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम को अपनी भावनाओं से अवगत कराने का सुझाव दिया है।

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