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देश का खुदरा व्यापार सरकारी सहायता के अभाव में दम तोड़ेगा : कैट 

रविशंकर शर्मा  | 01 Apr , 2020 10:50 PM
देश का खुदरा व्यापार सरकारी सहायता के अभाव में दम तोड़ेगा : कैट 

रायपुर। कॉनफेडरेशन आफ आल इंड़िया ट्रेडर्स (कैट) के पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी किया है। उन्होंने देश में लॉकडाउन की वर्तमान स्थिति का आंकलन करते हुए कहा कि कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन से उत्पन्न होने वाली समस्याओं से निपटने के लिए सरकार की ओर से अनेक कदम उठाये गए हैं। फिर भी भारतीय व्यापारियों के एक महत्वपूर्ण हिस्से को बेहद असाधारण परिस्थित का सामना करना पड़ेगा। समय रहते यदि कदम नहीं उठाए गए तो इस कठिन समय और वित्तीय संकट के कारण भारत का व्यापार अपनी मौत के मरने के कगार पर खड़ा होगा।

कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने कहा कि भारत में 7 करोड़ छोटे,मध्यम व्यापारियों में से लगभग एक करोड़ प्रतिष्ठान व्यवसायिक आवश्यक वस्तुओं के व्यापार से जुड़े हुए हैं। इनमें से लगभग 20 प्रतिशत से 25 प्रतिशत ही वर्तमान समय में अपने व्यापार को चालू रख पा सके हैं। जबकि तथाकथित बहुराष्ट्रीय ई कॉमर्स दिग्गज,जो अपने तकनीकी विकास के बारे में बड़ी बात करते हैं, सभी ने वर्तमान परिस्थितियों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है। देशवासी अब अच्छी तरह से जान गए है कि भारत के नागरिकों की जरुरत का सच्चा मित्र कौन है। पिछले कई दशकों से हर संकट में भारत के व्यापारी एकजुटता में दृढ़ रहे हैं और कैट कोरोना संकट के ऐसे सच्चे योद्धाओं को सलाम करता है।
पारवानी ने कहा कि लगभग 6.5 करोड़ से अधिक व्यापारियों ने राष्ट्रीय तालाबंदी के मद्देनजर अपने शटर पूरी तरह से बंद कर दिए हैं। उनके पास राजस्व का कोई साधन नहीं है और वे लंबे समय तक आय के बिना बने रहेंगे। भले ही सरकार ने विभिन्न विनियामक अनुपालन को स्थगित करने और ऋण की किश्तों आदि में कटौती जैसे कुछ उपायों की घोषणा की हो, लेकिन ये उपाय अल्पावधि पैकेज के बिना अल्पावधि में कुछ कार्यशील पूंजी दबाव को कम कर देंगे और ये उपाय अत्यधिक अपर्याप्त होंगे।

कैट ने सरकार हस्तक्षेप करने का किया आग्रह
कैट ने सरकार से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए कहा है कि सभी प्रकार के ऋणों पर प्रभावी लॉकडाउन अवधि के लिए बैंक ब्याज शुल्क की छूट आगे बड़ाई जाए , कार्यशील पूंजी और तरलता को कम करने के लिए तीन महीने के लिए सभी कर भुगतानों को स्थगित करना, किराये की कैपिंग 25प्रतिशत-35 प्रतिशत तक करना ताकि मकान मालिक और किराएदार दोनों इस कठिन समय से बच सकें,लॉक डाउन अवधि के लिए व्यापारियों पर कर्मचारियों को वेतन देने के बोझ में सरकार की सहायता बेहद जरूरी है। सरकार ने कर्मचारियों को पूर्ण वेतन देने का निर्देश जारी किया है जबकि छोटे व्यापारी को बिना किसी राहत के अपने सभी नियमित खर्चों को वहन करना है। हमने सरकार से एक फामूर्ला तैयार करने का अनुरोध किया है, जहाँ कुछ प्रतिशत सरकार दे एवं कुछ प्रतिशत व्यापारी तथा कुछ प्रतिशत कर्मचारी भुगते के आधार पर वेतन का भुगतान किया जाए ताकि कर्मचारी और व्यापारी दोनों बच सकें।
कैट ने आग्रह किया है कि पहले से ही उतारे गए माल के जोखिम को कवर करने के लिए बंदरगाहों, रेलवे और अन्य स्थानों पर लगाए जाने के लिए पेनल्टी शुल्क आदि से बचाने के लिए इन सभी को फॉर्स मैच्योर क्लॉज में शामिल किया जाए। व्यापारियों और अन्य लोगों को सभी सरकारी भुगतान 45 दिनों के मानक के अनुसार किए जाएं। जीएसटी और आयकर के तहत व्यापारियों को रिफंड तुरंत दिया जाना चाहिए जो व्यापारियों के लिए एक वित्तीय राहत हो सकती है। कैट ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि सरकार थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं और उनके कर्मचारियों जो आवश्यक सुविधाओं के लिए काम कर रहे हैं,उनको 50 लाख स्वास्थ्य बीमा दिया जाए। देश की चिकित्सा बिरादरी,पैरा मेडिकल फॉर्स, सफाई कर्मचारी की भांति व्यापारियों को भी कोरोना योद्धा माना जाए। पारवानी ने कहा कि हम आशा करते हैं कि सरकार की ओर से ये व्यापक उपाय देश के रिटेल व्यापार को एक मजबूत और आशावादी भारत के निर्माण में मदद कर सकते हैं।

 

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