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बच्चों का कराया गया स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार

बीएन यादव  | 25 Feb , 2021 05:38 PM
बच्चों का कराया गया स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार

कोरबा। बुधवार को बुध पुष्य नक्षत्र में एवं गुरुवार को गुरु पुष्य नक्षत्र में स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार किया गया। इसमें अंचल के सैकड़ों बच्चे लाभान्वित होकर इसके अप्रत्याशित चमत्कारिक परिणाम का लाभ ले रहे हैं। स्वर्ण प्राशन ले रहे बच्चों एवं अभिभावकों ने अपने बच्चों में हो रहे परिवर्तन के बारे में बताया। बच्चों को सर्दी,बुखार,सिर दर्द,किसी काम में मन नहीं लगना, याददाश्त की कमी, खून की कमी,कमजोरी आदि बहुत सारी चीजों पर अप्रत्याशित लाभ हुआ है।बच्चों की कार्यक्षमता, स्मरणशक्ति एवं क्रियाशीलता भी बढ़ गई है। इसके लिए उन्होंने संस्थान एवम संस्थान के चिकित्सक डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा का आभार प्रकट किया। संस्थान के चिकित्सक डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा ने बताया कि स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार बच्चों में किये जाने वाले 16 मुख्य संस्कारों में से स्वास्थ्य की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण संस्कार है।

जो हजारों वर्ष पुरानी आयुर्वेदिक टीकाकरण पद्धति है। संस्थान के चिकित्सक वैद्य डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में जिस प्रकार बच्चों की सामान्य बीमारियों से बचाव के लिए तथा रोगों से लड़ने की शक्ति को बढ़ाने के लिये  वैक्सीन्स का उपयोग  किया जाता है । उसी प्रकार आयुर्वेद में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिये स्वर्ण प्राशन संस्कार किया जाता है,जो कि एक प्रकार का आयुर्वेदिक इम्यूनाइजेशन है। इसका उल्लेख हमारे आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ कश्यप संहिता एवं सुश्रुत संहिता में प्रमुखता से है।

यह प्राचीन समय से चला आ रहा है लेकिन अब यह संस्कार विलुप्त हो गया है,जिसे पुनर्जीवित करने का प्रयास संस्थान द्वारा स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार के माध्यम से किया जा रहा है। इससे स्वस्थ निरोगी समाज का निर्माण हो सके। स्वर्ण बिन्दु प्राशन बच्चो के सम्पूर्ण शारीरिक एवं बौद्धिक विकास के लिये, लिये अमृततुल्य वरदान है। इसे पुष्य नक्षत्र में देने से बच्चों की रोगप्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ने के साथ साथ उनकी स्मरण शक्ति तीव्र होकर उनकी रचनात्मक एवं क्रियात्मक विकृतियां दूर होती हैं। इससे बच्चे न केवल रोगमुक्त होकर स्वस्थ होते हैं अपितु  विलक्षण प्रतिभाशाली बनते हैं। स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार में डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा के अलावा प्रतिभा शर्मा, चक्रपाणि पांडेय, नेत्रनन्दन साहू, कमल धारिया, अश्विनी बुनकर, लखन चंद्रा, धीरज तम्बोली, सिद्धराम सारथी, रोशन कुंजल एवं राकेश इस्पात ने विशेष रूप से उपस्थित होकर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

 

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