GLIBS

वन अधिकार मान्यता पत्र देने में देश का अग्रणी राज्य बना छत्तीसगढ़, वनवासियों के चेहरे पर खुशियां अपार

राहुल चौबे  | 18 Aug , 2020 08:02 PM
वन अधिकार मान्यता पत्र देने में देश का अग्रणी राज्य बना छत्तीसगढ़, वनवासियों के चेहरे पर खुशियां अपार

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्वयं वन अधिकार मान्यता अधिनियम-2006 के कार्यों की समीक्षा करने के साथ पूर्व में निरस्त दावों की त्रुटियों को सुधार कर वनवासियों को उनके पर्यावास से जोड़ रहे हैं। तब से वन अधिकार पट्टा वितरण के कार्यों में प्रगति आई है। अब परम्परागत वनवासियों, अनुसूचित जनजातियों को अपना घरौंदा टूटने का भय, बेदखल होने का डर नहीं सताता। शासन द्वारा वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत वितरित भूमि में समतलीकरण एवं मेड़ बंधान कार्य, खाद एवं बीज, कृषि उपकरण, सिंचाई के लिए नलकूप, कुआं, स्टापडैम, प्रधानमंत्री आवास से भी लाभान्वित किया जा रहा है। व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार मान्यता पत्र मिलने से वनग्रामों में निवास करने वाले वनवासी निश्चिंत होकर रहने लगे हैं। इनकी प्रगति के द्वार भी खुल गए हैं। अधिनियम-2006 के अंतर्गत प्रदेश का पहला सामुदायिक वन संसाधन अधिकार मिलने के बाद गांव की सीमा से लगे वन पर गांववालों का अधिकार हो गया है। धमतरी जिले के विकासखण्ड नगरी के अंतर्गत आने वाला ग्राम जबर्रा औषधीय पौधों के लिए पहले से विख्यात है। इस गांव को वन संसाधन अधिकार के रूप में मान्य किया गया है। इस अधिकार के बाद ग्रामसभा के पारम्परिक सीमा के भीतर स्थित जंगल के सभी सामुदायिक संसाधनों का संरक्षण, पुनरुत्पादन तथा प्रबंधन जैसे पौधरोपण, जंगल का रखरखाव, वन्यप्राणियों, जैव विविधता की सुरक्षा गांववासी करने लगे हैं। उन्हें जंगल पर नैसर्गिक अधिकारों की मान्यता मिल गई है। यहां 5,352 हेक्टेयर क्षेत्र में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार की मान्यता दी गई है। ग्रामसभा अधिनियम की धारा 5 के अनुसार वन संसाधनों तक पहुंच को भी विनियमित किया जा सकता है। यह देश में किसी एक गांव को मान्य किए जाने वाला सर्वाधिक क्षेत्र है। यह वन विभाग के 17 कम्पार्टमेंट में तथा 3 बीट में फैला है। यहां वन प्रबंधन समिति बनाकर देख-रेख के लिए नियम बनाए गए हैं।

वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ आगे

वन अधिकार अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य अन्य प्रदेशों की तुलना में आगे है। यहां 4 लाख 41 हजार व्यक्तिगत वन अधिकर दावे स्वीकृत हैं। जून 2020 की स्थिति में प्रदेश में 8 लाख 9760 व्यक्तिगत दावे प्राप्त हुए जिनमें से 4 लाख 22 हजार 539 वितरित किए गए। सामुदायिक वन अधिकार के 35 हजार 558 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 30 हजार 941 वितरित किए गए। कुल 4 लाख 53 हजार  480 वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। मध्यप्रदेश में 2 लाख 56 हजार 997, महाराष्ट्र में एक लाख 72 हजार 116, ओड़िशा में 4 लाख 43 हजार 761 और गुजरात में 93 हजार 704 सामुदायिक तथा व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र वितरित किए गए हैं। छत्तीसगढ़ में 39 लाख 12 हजार 228 एकड़ भूमि वन भूमि के रूप में मान्य किए गए हैं।

बस्तर संभाग में सबसे अधिक वन अधिकार पत्र वितरित

बस्तर के आदिवासियों की परंपराएं, कला व संस्कृति, रहन-सहन, भाषा, बोली की अपनी अलग पहचान है। ऐसे में वन अधिकार मान्यता पत्र बस्तर के वनवासियों को अधिक से अधिक संख्या में मिले, यह शासन-प्रशासन की प्राथमिकता में है। प्रदेश में वन अधिकार पत्र का वितरण सबसे अधिक बस्तर संभाग में हुआ है। यहां एक लाख 45 हजार 699 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र वितरित किए गए हैं। सामुदायिक वन अधिकार के 14405 अधिकार पत्र वितरित किए गए हैं। सरगुजा संभाग में एक लाख 9 हजार 22 व्यक्तिगत, 8 हजार 755 सामुदायिक वन अधिकार, बिलासपुर संभाग में 85 हजार 292 व्यक्तिगत और 3256 सामुदायिक वन अधिकार, रायपुर संभाग में 51 हजार 523 व्यक्तिगत और 2179 सामुदायिक, दुर्ग संभाग में 31 हजार तीन व्यक्तिगत और 2346 सामुदायिक वन अधिकार पत्र का वितरण किया गया है।

जगदलपुर देश का पहला नगर निगम जहां शहरी लोगों को मिला वन अधिकार पत्र

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर राज्य में वनवासियों की खुशहाली और वनांचल के गांवों को स्वावलंबी बनाने के उद्ेदश्य से इंदिरा वन मितान योजना शुरू किए जाने की भी घोषणा की है। इस योजना के तहत राज्य के आदिवासी अंचल के दस हजार गांव में युवाओं के समूह गठित कर उनके माध्यम से वन आधारित  समस्त आर्थिक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इसी तरह छत्तीसगढ़ का जगदलपुर देश का पहला नगर निगम बन गया है जहां शहरी लोगों को वन भूमि का अधिकार पत्र प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर 4 लोगों को वन अधिकार पत्र देकर इस अभियान की शुरुआत की। यहा 1777 लोगों ने आवेदन किया है। जिस पर कार्यवाही चल रही है। इस तरह देखा जाए तो छत्तीसगढ़ के सरगुजा से लेकर बस्तर तक लगभग सभी जिलों में वन अधिकार मान्यता पत्र मिलने की खुशी वनवासी व परम्परागत निवासियों में है।

वनभूमि अधिकार पत्र के साथ योजनाओं का दिया जाता है लाभ

राज्य शासन द्वारा कई पीढ़ी या वर्षों से काबिज भूमि पर वन अधिकार मान्यता पत्र दिए जाने के साथ ही लाभान्वित हितग्राहियों को शासन की अनेक योजनाओं का लाभ देकर आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दिया जाता है। वितरित भूमि में भूमि समतलीकरण, मेड़ बंधान, खाद-बीज, कृषि उपकरण, सिंचाई सुविधा का लाभ तथा प्रधानमंत्री आवास योजना से भी लाभान्वित किया जाता है। प्रदेश में भूमि समतलीकरण एवं मेड़ बंधान से 1 लाख 49 हजार 762, खाद-बीज से 1 लाख 84 हजार 311, कृषि उपकरण से 11 हजार 40 तथा सिंचाई सुविधा नलकूप, कुआं, स्टापडैम से 41 हजार 237 हितग्राही लाभान्वित किए गए हैं।

 

Author/Journalist owns and is responsible for views/news published and the publisher/printer is in no way liable for such content.