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 कैट ने वित्त मंत्री की घोषणाओं को सराहा-ब्याज को समाप्त करने, वर्तमान वित्तीय वर्ष को 30 जून तक बढ़ाने किया आग्रह

रविशंकर शर्मा  | 25 Mar , 2020 10:20 PM
 कैट ने वित्त मंत्री की घोषणाओं को सराहा-ब्याज को समाप्त करने, वर्तमान वित्तीय वर्ष को 30 जून तक बढ़ाने किया आग्रह

रायपुर। कॉनफेडरेशन आफ आल इंड़िया ट्रेडर्स (कैट) ने वित्त मंत्री की ओर से आयकर, जीएसटी और अन्य अधिनियमों के तहत विभिन्न वैधानिक अनुपालनों की  तारीख को आगे बढ़ाने के लिए की गई विभिन्न घोषणाओं की सराहना की है। कैट ने कहा की इस विस्तारित तारीख की घोषणा ने देश भर के व्यापारियों को एक बड़े बोझ से मुक्त कर दिया है। उन्हें इस बात का डर था कि जब सब कुछ लॉकडाउन है तो ऐसे में वैधानिक अनुपालन कैसे होगा। यह कदम व्यापारियों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में कैट ने 30 जून तक सभी वैधानिक अनुपालन के विस्तार की मांग की थी।

वित्त मंत्री की घोषणाओं का स्वागत
कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने वित्त मंत्री की घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा कि ब्याज दर कम करने के बजाय विस्तारित अवधि के लिए ब्याज वापस लेना बेहतर होगा। पारवानी ने वित्त मंत्री को विस्तारित अवधि के लिए ब्याज की पूर्ण छूट देने का आग्रह किया। पारवानी ने कहा कि देश भर में 7 करोड़ व्यापारी बेहद उत्सुकता से सरकार की ओर से घोषित होने वाले आर्थिक पैकेज की प्रतिसजहा कर रहे हैं। कैट ने  वित्त मंत्री से वर्तमान वित्तीय वर्ष को से 31 मार्च बजाय 30 जून तक आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

वित्त मंत्री को दिए अन्य सुझाव
कैट ने कहा कि अगले वित्तीय वर्ष को नौ महीने के लिए किया जाए। बैंक ऋणों की वापसी, ईएमआई और अन्य बैंकिंग दायित्वों को 30 सितंबर तक बढ़ाया जाना चाहिए और विस्तारित अवधि पर कोई ब्याज या जुमार्ना नहीं वसूला जाना चाहिए। बिजली, पानी, संपत्ति कर जैसे सभी सरकारी बिलों का भुगतान 30 सितंबर तक स्थगित कर दिया जाना चाहिए और सेवाओं के ऐसे बिल में 50 प्रतिशत का डिस्काउंट दिया जाए। कर्मचारियों की भविष्य निधि में उनके 50 प्रतिशत हिस्से को आगामी छह महीने के लिए सरकार की ओर से वहन किया जाए। देश की सप्लाई चेन को सुचारू रूप से चलाने के लिए व्यापारियों को रियायती ब्याज दर पर कोरोना कैश लोन दिया जाए। नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां और माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशन को आर्थिक रूप से मजबूत व्यापारियों को रियायती दर पर ऋण देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। किसी भी व्यापारी के खाते को एनपीए घोषित नहीं किया जाए।

व्यापारियों को सब्सिडी प्रदान करने का आग्रह
वित्त मंत्री से आग्रह किया गया है कि सरकार को केवल तालाबंदी की अवधि के लिए अपने श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान करने के लिए व्यापारियों को सब्सिडी प्रदान करनी चाहिए। नकद करेंसी वायरस के गंभीर कैरियर में से एक है और इसलिए डिजिटल भुगतान को देश भर में प्रेरित करने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान है व्यापारिक संगठनों के सहयोग से व्यापारियों से देश भर में चलाया जाना चाहिए। डिजिटल लेनदेन पर लगाए गए बैंक शुल्क को या तो माफ किए जाने चाहिए या सरकार को सीधे बैंकों को सब्सिडी देनी चाहिए और न ही व्यापारी को और न ही उपभोक्ता पर बैंक शुल्क लगाया जाए। व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए एक आकर्षक उपहार या कर छूट योजना प्रदान की जा सकती है,जो डिजिटल भुगतान को अपनाते है। व्यापारियों की एक संयुक्त समिति व्यापारियों और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रत्येक जिला स्तर पर गठित की जाए। लॉकडाउन और प्रतिबंधों के दौरान, ई-कॉमर्स कंपनियों को केवल आवश्यक वस्तुओं को बेचने की अनुमति दी जानी चाहिए और अन्य किसी भी सामान के बिक्री के लिए उनके पोर्टल को फिलहाल प्रतिबंधित किया जाए। 

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